राष्ट्र और समाज के विकास में विचारों का आदान-प्रदान आवश्यक,  . … कुलपति

शांति और संतुलन का द्योतक है, भारत की विदेश नीति , …. प्रो.श्री प्रकाश

आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के परिसर में स्थित न्यू सेमिनार हाल में राजनीति विज्ञान विभाग व भारतीय राजनीति विज्ञान परिषद के संयुक्त तत्वाधान में दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का भव्य आगाज विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार एवं मुख्य अतिथि के रूप में पधारे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विश्वविद्यालय अमरकंटक मध्य प्रदेश के पूर्व कुलपति प्रो. श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी ,विशिष्ट अतिथि सिद्धार्थ विश्वविद्यालय सिद्धार्थनगर के प्रो. रजनीकांत व छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. बी.के. सारस्वत आदि ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर एवं विधिवत दीप प्रज्वलन कर किया।

विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी ने बताया कि अतिथियों द्वारा दीप प्रज्वलन के उपरांत विश्वविद्यालय की बेटियों ने ज्ञान की देवी मां सरस्वती की वंदना की तथा विश्वविद्यालय का कुलगीत प्रस्तुत कर माहौल को संगीतमय बना दिया। कार्यक्रम के संयोजक सूर्यप्रकाश अग्रहरि व सह-संयोजिका डॉ. दीक्षा उपाध्याय ने अपने उद्बोधन के माध्यम से अतिथियों का स्वागत किया। विश्वविद्यालय के मुखिया प्रो. संजीव कुमार ने मंचासीन सभी अतिथियों को पुष्प-गुच्छ एवं विश्वविद्यालय का प्रतीक चिन्ह देखकर स्वागत किया। मंचासीन अतिथियों ने डॉ. दीक्षा एवं श्री अग्रहरि द्वारा रचित पुस्तक का लोकार्पण भी किया।

अपने उद्बोधन में प्रो. रजनीकांत ने कहा किसी भी किताब के लोकार्पण के पीछे एक तपस्या छिपी रहती है। हम दोनों लेखकों को इसके लिए बधाई देते हैं। विदेश-नीति पर सजग टिप्पणी करते हुए प्रो. रजनीकांत ने कहा कि शुरू से ही भारत की स्वतंत्र विदेश-नीति अंतरराष्ट्रीय मंच पर देश को अलग स्थान देती है। वर्तमान में अमेरिका-इजरायल व ईरान युद्ध में भारत की कूटनीतिक घेरेबंदी ने हमारे देश को ईधन की समस्या से बचा लिया। महात्मा गांधी की नीतियों पर चलकर हम एक सजग व सफल राष्ट्र का निर्माण कर सकते हैं। कोविड-19 का उल्लेख करते हुए प्रो. सिंह ने कहा कि भारत की आत्मनिर्भरता से विश्व भी आश्चर्यचकित हो गया।

मुख्य अतिथि के रूप में पधारे प्रो. श्री प्रकाश मणि त्रिपाठी ने पंचशील सिद्धांतों की चर्चा करते हुए कहा कि नेहरू जी की यही रणनीति देश के काम आयी , शुरुआती संकट से देश को उबारने व आत्मनिर्भर बनाने में पंचशील का हथियार राष्ट्र की प्रगति का सहायक बना। भारत की विदेश नीति में शांति एवं संतुलन का जबरदस्त समावेश दिखाई पड़ता है। वर्तमान में हमारी विदेश नीति शाफ्ट एवं हार्ड पावर का समीकरण है। भारत ने रक्षा क्षेत्र में आशातीत सफलता प्राप्त की है। ताकतवर राष्ट्र विदेश नीति के सफलता की गारंटी है। इसलिए हमें हर हाल में निश्चित लक्ष्य-2047 को विकसित भारत के रूप में परिवर्तित करना होगा। विशिष्ट अतिथि प्रो. बी.के. सारस्वत में कहा कि धर्म को प्रकृति से सीखना चाहिए पृथ्वी ,सूर्य ,जल इत्यादि का मानव द्वारा अतिशय दोहन के पश्चात भी वह अपना दायित्व निर्वहन समयानुसार करती रहती है। हम मनुष्यों को प्रकृति से सीखने की आवश्यकता है ।

अपने अध्यक्षीय संबोधन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार जी ने आए हुए सभी अतिथियों का विश्वविद्यालय परिसर में स्वागत किया तथा कहा कि विचारों के आदान-प्रदान से हमें दोहरा लाभ मिलता है । आयोजन समिति को इसके लिए विशेष आभार कि उन्होंने अंतरराष्ट्रीय उतल-पुथल के बीच आत्मनिर्भर भारत एवं भारत की विदेश नीति का विकास और चुनौतियां विषय पर राष्ट्रीय संगोष्ठी रखकर देश के नवयुवकों का बेहतर मार्गदर्शन किया है। यही समय है कि हम अकारण फैलाई गई अफवाहों से बचें, आवश्यकतानुसार राष्ट्र पर अपना सब कुछ उत्सर्ग कर दें। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्रा ने आए हुए सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा कुलपति जी के नेतृत्व में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों विशेष तौर पर राजनीति विज्ञान के प्राध्यापक गण द्वारा नित नए नवाचार प्रस्तुत करने के लिए विशेष धन्यवाद दिया तथा छात्र-छात्राओं को पूरे मनोयोग से संगोष्ठी में सहभाग कर लाभान्वित होने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में अन्य महान विभूतियों के अतिरिक्त प्रो0 अजीत राय, प्रो0 सुजीत श्रीवास्तव, डॉ शफ़ी, डॉ जयप्रकाश, डॉ शुभम, डॉ त्रिशिका, डॉ निधि डॉ विजय, डॉ नितेश,आदि उपस्थित रहे, कार्यक्रम का संचालन डॉ वैशाली ने किया।

डॉ. प्रवेश सिंह मीडिया प्रभारी महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ 94 52 4458 78

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