डॉक्टर और उनके निजी सहयोगियों द्वारा अस्पताल में दलाली और जिला अस्पताल में फैली दुर्व्यवस्थाओं को उजागर करने पर पत्रकार के ऊपर मुकदमा दर्ज।
फर्जी मुकदमे से कलम की आवाज दबाने की जिला अस्पताल की कोशिश।
अस्पताल में फैले कई भ्रष्टाचार और डॉक्टर और उनके सहयोगियों द्वारा दलाली करने पर पत्रकार द्वारा प्रकाशित की जा चुकी है खबरें।
डॉक्टर और उनके निजी सहयोगीयो द्वारा दवा लिखने की खबर को प्रकाशित करना मुकदमे का कारण।
आजमगढ़, प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ द्वारा जहां पत्रकारों को खबर प्रकाशन में हर तरह के सहयोग की बात कह रहे है वहीं मंडलीय जिला चिकित्सालय में कार्यरत डॉक्टर द्वारा किए जा रहे अनैतिक कार्यो और दलाली की खबर प्रकाशन पर पत्रकार पर ही मुकदमा दर्ज कर दिया गया है। वहीं शहर कोतवाली की तेज तर्राक पुलिस ने मामले में बिना तहकीकात किये पत्रकार पर तुरंत मुकदमा दर्ज कर लिया। मंडलीय चिकित्सालय आए दिन अपने कारनामे और दुर्व्यवस्था के कारण अखबार की सुर्खियों में बना रहता है। लेकिन अस्पताल में हो रही अनैतिक कार्यों और डॉक्टर और उनके निजी सहयोगियों द्वारा दवा के नाम पर जांच के नाम पर इलाज के नाम पर ऑपरेशन के नाम पर मरीज से धन उगाही और दलाली करने का विरोध करने पर पत्रकार मधुर श्रीवास्तव को जिला अस्पताल में ही कार्यरत डॉक्टर सीपी राय द्वारा फर्जी तरीके से कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया है। जिला अस्पताल में तैनात डॉक्टर चंद्र प्रकाश राय द्वारा दलाल बनाकर मरीजों को कमीशन युक्त महंगी दवाएं लिखकर खुद मेडिकल स्टोर का नाम बताने पर पत्रकार मधुर श्रीवास्तव द्वारा प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई थी। डॉ चंद्र प्रकाश द्वारा मरीज के साथ गाली गलौज और दुर्व्यवहार करने का मामला कई बार हो चुका है। कुछ महापूर्व डॉक्टर चंद्र प्रकाश राय का ड्राइवर मरीज को बाहर की दवा लिख रहा था। तत्कालीन प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अनूप कुमार श्रीवास्तव के द्वारा अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा और डॉक्टर के निजी सहयोगियों द्वारा दलाली करने पर और मरीजों को बाहर की कमीशन युक्त दवाइयां लिखने पर पुलिस अधीक्षक को पत्र के द्वारा सूचित किया था। तत्कालीन शहर कोतवाल शशि चौधरी द्वारा इस मामले को संज्ञान में लेने के बाद जिला अस्पताल के ओपीडी में दलालों को पकड़ने के लिए दबिश दी गई तो अस्पताल के ओपीडी कमरा नंबर 17 में तैनात डॉ चंद्र प्रकाश राय का निजी ड्राइवर दलाली करते हुए और मरीजों को दवा लिखते हुए पकड़ा गया था। आए दिन डॉक्टर चंद्र प्रकाश राय अपनी दुर्व्यवस्थाओं और उनके निजी सहयोगियों द्वारा दलाली करने के कारण सुर्खियों में बने रहते हैं। इस मुकदमा के माध्यम से कहीं ना कहीं जिला अस्पताल से जुड़े हुए मुखिया व डॉक्टर द्वारा अनैतिक कार्यों को उजागर करने वाले के ऊपर मुकदमा दर्ज कराएंगे, इस तरह का संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं। ज्ञात होगी गुरुवार को ओपीडी कमरा नंबर 17 में तैनात डॉ सी पी राय और किसी अन्य से कोई विवाद हो रहा था विवाद की जानकारी लेने के लिए पहुंचे स्वतंत्र चेतना के जिला संवाददाता मधुर श्रीवास्तव को डॉक्टर द्वारा बार-बार अपशब्द का प्रयोग किया गया वहीं डॉक्टर से किसी बात के लिए तेज आवाज में बात कर रहे शख्स के साथ जोड़कर जिला अस्पताल में कार्यरत डॉक्टर द्वारा कलम की आवाज दबाने की कोशिश की गई है ज्ञात हो कि स्वतंत्र चेतना और स्वतंत्र चेतना के संवाददाता द्वारा जिला अस्पताल में मरीज को दी जाने वाली जीवनदायनी बेश कीमती दवाएं कूड़े में फेकी गई थी को उजागर करना ,डॉक्टरों और उनके निजी सहयोगियों व अनाधिकृत व्यक्तियों द्वारा मरीज और उनके तीमारदारों से इलाज और ऑपरेशन के नाम पर अवैध वसूली, प्राइवेट पैथोलॉजी संचालकों से जांच ,बाहर के मेडिकल वालों का नाम बता कर दवाएं लिखना इन सभी दुर्व्यवस्थाओं का विरोध में खबरों का प्रशासन लगातार किया जा रहा है। खबरों के प्रशासन से बौखलाए जिला अस्पताल में कार्यरत डॉक्टरों द्वारा अपने आपस के विवाद में पत्रकार को घसीटना कहीं ना कहीं सत्य की आवाज दबाने की कोशिश है। पत्रकार पर इस तरह का फर्जी मुकदमा दर्ज करवाना व प्रशासन द्वारा बिना छानबीन के मुकदमा दर्ज कर लेना कहीं ना कहीं पत्रकारों की कलम की और सत्य की आवाज दबाने की कोशिश की जा रही है।
डॉक्टर और उनके निजी सहयोगीयो द्वारा दवा लिखने की खबर को प्रकाशित करना मुकदमे का कारण।
आजमगढ़ दवा की दुकान का नाम बता कर दवा लिखने का विरोध की खुन्नस में डॉक्टर सीपी राय द्वारा पत्रकार पर दर्ज कराया गया फर्जी मुकदमा ज्ञात होगी कुछ महीने पहले शिकायतकर्ता डॉक्टर सीपी राय व उनके सहयोगियों द्वारा केबिन में विशेष मेडिकल हाल का नाम लिखकर मरीज को दवा लिखने का पत्रकार द्वारा वीडियो बनाया गया था। कुछ दिन पहले ही डॉक्टर सीपी राय के चेंबर में बाहरी व्यक्तियों द्वारा डॉक्टर के साथ बैठकर मरीज को दवा लिखने की खबर भी पत्रकार मधुर श्रीवास्तव द्वारा प्रकाशित की गई थी। जिसकी खुन्नस व अस्पताल में पहले भ्रष्टाचार के विरोध में खबर प्रकाशित करने के कारण फर्जी तरीके से डॉक्टर द्वारा शहर कोतवाली में पत्रकार के ऊपर दर्ज कराया गया मुकदमा। इस विषय में जब शहर कोतवाल से बात की गई तो उनके द्वारा कहा गया कि तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया है और जांच में जो सही होगा वह किया जाएगा अब यह तो जांच का विषय होगा कि पत्रकार की आवाज दबाना कहां तक न्याय संगत है जहां मारपीट के बड़े मामले में भी मुकदमा दर्ज करने से पहले ज्यादातर पुलिस थानों पर दोनों पक्षों को बुलाया जाता है मामूली कहा सुनी की बात में और बिना किसी प्रूफ के पत्रकार के ऊपर भी फर्जी तरीके से मुकदमा दर्ज कर लेना कहीं ना कहीं कलाम की आवाज को दबाने की कोशिश है
