दौरान डूबने से चार बच्चों की मौत की घटना ने लोगों को हिला कर रख दिया है। घटना के बाद पूरी रात मृत बच्चों के घरवालों की सिसकियां और चित्कार सन्नाटे को चिरती रहीं। गुरुवार की सुबह सभी बच्चों का शव गांव में पहुंचा तो परिजनों के साथ ही पूरा गांव रो पड़ा। हर ओर चीख पुकार ही सुनाई दे रही थी। मृत सगे भाइयों के पिता दिल्ली से घर लौटे तो बच्चों के शव देखकर दहाड़े मारकर रोने लगे। गांव के श्मशान स्थल पर एक साथ चारों मृत बच्चों का अंतिम संस्कार किया गया। जिले के दीदारगंज थाना क्षेत्र के कुशलगांव के रहने वाले यश (08), अंश (08), समर उर्फ राजकुंवर (09) व राजकमल (05) बुधवार को दिन में गेहूं की बाल एकत्र करने के लिए घर से निकले थे। वे गांव के उत्तर स्थित पोखरी की तरफ गए थे। आसमान से बरस रही आग की तपन से परेशान होकर चारों बच्चे पोखरी किनारे कपड़े उतारकर नहाने चले गए और पोखरी में डूब गए। मवेशी चरा रहे एक व्यक्ति ने पोखरी के किनारे रखे बच्चों के कपड़ों को देखा तो आशंका होने पर उसने शोर मचाया। भारी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुटे तो कुछ लोग पोखरी में बच्चों को ढूंढने उतर गए। कुछ ही देर में चारों बच्चों को अचेतावस्था में पोखरी से निकालकर इलाज के लिए जौनपुर ले जाया गया। जहां इलाज के दौरान देर शाम चारों की मौत हो गई। गुरुवार की सुबह छह बजे के लगभग चारों बच्चों के शव जौनपुर में पोस्टमार्टम के बाद गांव पहुंचे। शव पहुंचते ही पूरे गांव में कोहराम मच गया। मृत बच्चों के परिजनों के साथ ही पूरे गांव के लोगों की आंखों से आंसू निकल पड़े। मृतकों में शामिल सगे भाइयों के पिता भी घटना की सूचना पर दिल्ली से लौट आए। बच्चों के शव देखकर वह बेहोश हो जा रहे थे। घरवालों का बिलखना देख वहां मौजूद हर शख्स रो पड़ा। लोगों की जुबान पर सिर्फ एक ही बात थी, कि भगवान ऐसा दिन किसी को न दिखाएं। चारों बच्चों के शव का गांव के ही श्मशान स्थल पर अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान कई जनप्रतिनिधियों के साथ ही रिश्तेदार व पूरा गांव मौजूद रहा। पीड़ित परि

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