
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीना को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजन उसे पहले 100 बेड हॉस्पिटल ले गए। वहां दर्द न होने की बात कहकर चिकित्सको ने वापस भेज दिया, तथाकथित एक आशा ने उन्हें गुमराह करते हुवे न्यू आयुष नर्सिंग होम में भर्ती कराया। नर्सिंग होम में मौजूद डॉक्टर ने परिजनों को 3 घंटे में प्रसव कराने का आश्वासन दिया, कुछ समय बाद ही नॉर्मल डिलीवरी हुई। डिलीवरी के तुरंत बाद करीना की हालत बिगड़ गई, इसके बाद चिकित्सक ने शनिवार को उसे वाराणसी रेफर कर दिया,जहाँ रास्ते में ही नवजात जच्चा बच्चा दोनों की मौत हो गई। इन झोलाछाप डॉक्टरों के पास ना ही कोई डिग्री है और ना ही कोई लाइसेंस है।अब सवाल खड़ा होता है कि किसके श पर झोलाछाप छाप डॉक्टर इन भोली भाली जनता की जान लेते रहेंगे, प्रदेश की योगी सरकार कब इन फर्जी हॉस्पिटलो को संज्ञान में लेजर कठोर कार्यवाही करगें, परिजनों का हंगामा देख अस्पताल संचालक और चिकित्सक दोनों मौके से फरार होने में सफल रहे, परिजनों का आरोप है कि डॉक्टर की लापरवाही और इलाज में अभाव में हमारे परिवार की मौत हुई हैं। सबसे बड़ी बात तो यह है कि जिस डग्गामार एंबुलेंस से प्रसूता को हायर सेंटर वाराणसी भेजा गया उसमें ऑक्सीजन ही नहीं था, घटना की सूचना 1076 और 100 नंबर पर दी गई काफी देर बाद पुलिस मौके पर पहुंची परिजनों को चौकी लाई हैं। अस्थानिय लोगो ने बताया कि आयुष नर्सिंग होम के नाम से पहले चलाया जाता था। सीएमओ द्वारा चलाये गए चेकिंग अभियान में पंजीकरण न मिलने पर उक्त अस्पताल को सील कर दिया गया था। छेत्रिय लोगों का आरोप है कि सीएमओ की मिली भगत से सील होने के कुछ दिन बाद बगल में एक मोटी रकम लेकर उक्त अस्पताल का नाम बदल कर न्यू आयुष नर्सिंग होम के नाम से शुरू किया गया है। अगर स्वास्थ्य महकमा इस पर ध्यान देता तो गरीब दलित परिवार करीना और उसके बच्चे की मौत नहीं होती। जिले के जिम्मेदार अधिकारियों पर गम्भीर सवाल खड़ा होता है और लालगंज की जनता आशा लगाए बैठी हुई है। कि लालगंज में फर्जी झोलाछाप डॉक्टरों की जाँच कर कार्यवाही होगी या आजमगढ़ जिले के जिम्मेदार अधिकारि मोटी रकम लेकर फर्जी झोलाछाप डॉक्टर अपनी दुकान चलाते रहेंगे औऱ भोली भाली जनता की जान लेते रहेंगे।

