आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार ने विश्वविद्यालय परिसर के प्रशासनिक भवन में स्थित कुलपति कक्ष में आज प्रेस वार्ता आयोजित कर स्पष्ट रूप से संदेश दिया कि विश्वविद्यालय में अनुशासनहीनता कदापि स्वीकार नहीं की जाएगी । क्योंकि मेरे लिए विश्वविद्यालय की गरिमा और छात्र हित सर्वोपरि है।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार सिंह ने बताया कि आज सुबह 11:00 बजे कुलपति कार्यालय में प्रेस वार्ता करते हुए विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर संजीव कुमार ने मीडिया कर्मियों की मौजूदगी में अवगत कराया कि शासन के निर्देश पर विश्वविद्यालय परिसर में लगातार कार्यक्रम आयोजित होते रहते हैं, क्योंकि माननीय राज्यपाल/ कुलाधिपत महोदया का स्पष्ट निर्देश है की पठन-पाठन के साथ साथ छात्र-छात्राओं के सोशल एक्टिविटी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद का कार्यक्रम एवं वृहद सेमिनार आयोजित कर उनका स्किल डेवलपमेंट कराया जाए जिससे वे हर क्षेत्र में ज्ञानार्जन प्राप्त कर सके। जो बी.ए. प्रथम वर्ष के छात्र द्वारा तथा कथित आरोप विश्वविद्यालय कर्मियों पर लगाए जा रहे हैं वह भी पूरी तरह बेबुनियाद है, क्योंकि छात्रों के हितार्थ मैं स्वयं मॉनिटरिंग करता हूं ,उस दिन का वाकया यह था कि राजभवन के निर्देश के क्रम में विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं रंगोली कार्यक्रम ,राखी बनाना तथा भोजन बनाने के के गुण सीख रहे थे , एक छात्र आकाश चौहान जिसके पिता का नाम राजेश चौहान है वह वीडियो बनाकर, गंदी गंदी गालियों की रिकॉर्डिंग कर उसे इंस्टाग्राम पर लोड कर दिया। जिस पर विश्वविद्यालय के जिम्मेदार लोगों द्वारा रोक लगाई गई तो वह अभद्र भाषा का प्रयोग करने लगा। विश्वविद्यालय के प्राध्यापक आकाश के पिता को बुलाकर उन्हें सारी घटनाओं से अवगत कराया, आकाश के पिता अपने पुत्र के कृत्य पर शर्मिंदगी जताते हुए प्राध्यापको से माफी ही नहीं मांगे ,अपितु आकाश को एक थप्पड़ मार भी दिए, साथ ही प्राध्यापकों से अनुरोध किए कि जब तक यह सुधर न जाए तब तक मोबाइल इसकी जब्त कर लीजिए पिता एवं बड़े भाई की भावनाओं का समाधान करते हुए शिक्षकों ने उसकी मोबाइल जब्त कर ली, हालांकि जब इसकी जानकारी मेरे स्तर पर मिली तो मैंने तुरंत प्राध्यापकों से कहा कि बच्चे भोले होते हैं ,अगर नादानी करें तो काउंसलिंग कर प्रयास करें कि प्रकरण अपने स्तर से ही निस्तारित हो जाए, अन्यथा उनके माता-पिता को बुलाकर उनसे अनुरोध करें। वैसे मैं स्वयं आज उस बच्चे की काउंसलिंग कर उसे समझाने का प्रयास करूंगा। हो सकता है कि बच्चा समझ जाए और प्रकरण निस्तारित हो जाए ।जहां तक उसकी माता के आरोप लगाने का प्रश्न है वह पूरी तरह कपोल कल्पित व मनगढ़ंत है, उस पर मुझे टिप्पणी नहीं करनी है। मैं भरसक प्रयास करूंगा कि आकाश चौहान को समझा बूझाकर उसे पठन-पाठन के लिए तैयार कर दूं। क्योंकि उसके लाइफ का प्रश्न है। परंतु यदि किन्हीं कारणो से वह समझने को तैयार नहीं होगा तो विश्वविद्यालय अनुशासनिक कार्रवाई करने के लिए बाध्य होगा। क्योंकि हम विश्वविद्यालय का माहौल किसी को खराब करने की इजाजत नहीं देंगे।
जहां तक वायरल वीडियो का प्रश्न है उसकी माता पुत्र मोह में मनगढ़ंत आरोप लगा रही है। मैं फिर कहता हूं विश्वविद्यालय के बच्चों को अनुशासन में रखना मेरी पहली प्राथमिकता होगी, जिससे पठन-पाठन सुचारु रूप से चल सके और विश्वविद्यालय की गरिमा में उत्तरोत्तर विकास हो सके।

