दशम आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयुर्वेद प्रदर्शनी का आयोजन।
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दशम आयुर्वेद दिवस के अवसर पर आयुर्वेद प्रदर्शनी का आयोजन।
रिपोर्ट मधुर श्रीवास्तव।
आजमगढ़, शिवालिक आयुर्वेद मेडिकल कॉलेज में भव्य आयुर्वेद प्रदर्शनी का आयोजन किया गया।
आयुर्वेद प्रदर्शनी का उदघाटन कॉलेज के चेयरमैन डॉ अशोक कुमार सिंह ने किया। उन्होंने छात्र छात्राओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि आप सब मन लगाकर आयुर्वेद की पढ़ाई पूरी करे एवं आयुर्वेद में ही चिकित्सा करने की सलाह दी। आयुर्वेद, जिसका अर्थ ‘जीवन का विज्ञान’ है, भारत की एक प्राचीन और समग्र चिकित्सा प्रणाली है जो शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन बनाने पर केंद्रित है। यह जड़ी-बूटियों, आहार, मालिश, योग और ध्यान जैसे प्राकृतिक तरीकों का उपयोग करता है। आयुर्वेद का लक्ष्य दोषों (वात, पित्त, कफ) के असंतुलन को ठीक करना और समग्र स्वास्थ्य को बढ़ावा देना है। आयुर्वेद एक वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली है जिसकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप में हैं। भारत, नेपाल और श्रीलंका में आयुर्वेद का अत्यधिक प्रचलन है, जहाँ लगभग ८० प्रतिशत जनसंख्या इसका उपयोग करती है। आयुर्वेद भारत की सबसे पुरानी चिकित्सा प्रणालियों में से एक है, जिसका इतिहास 3,000 से 5,000 साल पुराना है। यह न केवल रोगों के उपचार पर केंद्रित है, बल्कि स्वास्थ्य को बनाए रखने और दीर्घायु को बढ़ावा देने पर भी जोर देता है। आयुर्वेद या आयुर्वेदिक चिकित्सा भारत की पारंपरिक चिकित्सा पद्धति है, जो स्वास्थ्य और खुशहाली को बढ़ावा देने के लिए पंचकर्म (‘5 क्रियाएं’), योग , मालिश , एक्यूपंक्चर और हर्बल चिकित्सा सहित कई उपचारों का उपयोग करती है। आयुर्वेद प्राकृतिक और समग्र उपचार पर केंद्रित है, जो शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए जड़ी-बूटियों, आहार और जीवनशैली में बदलावों पर निर्भर करता है. यह व्यक्तिगत शारीरिक संरचना (त्रिदोष) के संतुलन पर ध्यान केंद्रित करता है और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने, तनाव कम करने, पाचन में सुधार करने, वजन प्रबंधन में मदद करने और मधुमेह व गठिया जैसी पुरानी बीमारियों से निपटने में प्रभावी है. आयुर्वेद का उद्देश्य रोगों का जड़ से इलाज करना और रोग-मुक्त जीवन जीना है। इस अवसर पर नर्सिंग के छात्र छात्राओं सहित कई अन्य विद्यालयों के बच्चों ने भी उत्साहपूर्वक भाग लिया। विद्यार्थियों ने आयुर्वेदिक औषधियों की पहचान, उनकी उपयोगिता तथा स्वास्थ्य में उनकी भूमिका को निकट से समझा। इस अवसर पर मैनेजिंग ट्रस्टी डा शौर्य विक्रम सिंह ,प्राचार्य डा सच्चिदानंद ,डॉ विभूति मिश्रा, डा.विशालाक्षी डॉ राघवेंद्र सिंह, डॉ आस्था वर्मा, डॉ पिंकी, डॉ सिम्मी, डॉ विवेक आनंद,डा गौरव सिंह , डॉ जगदीश हन्दिगूर, डॉ चन्दन गुप्ता, डा.वेद प्रकाश सिंह,डॉ पूनम, डॉ स्मिता झा, कालेज के छात्र छात्राओं की उपस्थित रहे ।