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गरीबो के मसीहा डाक्टर बी. के. पटेल मरीजो को देते है नि: शुल्क परामर्श एवं सहयोग

रिपोर्ट- डाक्टर बीरेन्द्र सरोज आजमगढ

आजमगढ़ / किसी के जख्म को मरहम दिया है अगर तूने, समझ ले तूने खुदा की बंदगी की है। इन्हीं शब्दों को आदर्श मानकर डॉ. बी के पटेल (SMO) ने गरीब, लाचार और बेसहारा के नाम अपनी जिंदगी को समर्पित कर दिया। गरीबों के इलाज को समय निर्धारण करते हुए सेवा की शुरुआत की डेढ दशक बाद भी बदस्तूर है। यह कहना गलत नहीं होगा कि जरूरतमंदों की सेवा ही उनकी जिदगी बन गई है। मूल रूप से थाना मडियाहू के अन्तर्गत ग्राम कुदनापुर निवासी डा. बी. के. पटेल आजमगढ के पी जी आई चक्रपानपुर मे (SMO) के पद पर नियुक्त है वहा से छुट्टी होने के बाद दोपहर दो बजे के बाद आजमगढ सिधारी स्तिथ जे. पी. मेडिकल एजेन्सी पर नि: शुल्क टी बी रोग के मरिजो को परामर्श देते है प्राप्त जानकारी के अनुसार अब तक लगभग पांच हजार 9 सौ 70 मरीज की जिन्दगी बचा चूके है उनका मानना है कि अनियमित खानपान के कारण आज लगभग हर कोई किसी न किसी बीमारी का शिकार हो रहा है लेकिन इलाज के लिए सभी के पास पैसे नहीं होते। ऐसे में हमने यह तय किया कि जो दे उसका भी भला और जो न दे उसका भी भला की तर्ज पर काम किया जाए। दोपहर से शाम तक बस एक ही धुन सेवा और बस सेवा बचपन से सेवा करने की इच्छा रहती थी डाक्टर बी के पटेल ने कहा माता पिता के आशीर्वाद व बचपन के अनुभव व सीख जीवन भर मार्गदर्शन करते हैं। उसके बाद ही मैंने जीवन का उद्देश्य बना लिया कि डाक्टर बनकर गरीब, लाचार और बेसहारों का नि: शुल्क परामर्श व उपचार करूंगा डा. बी. के पटेल (SMO) ने प्रति दिन लगभ 100से 150 मरीजों को परामर्श देकर जिन्दगी बचाने का कार्य करते है जनपद आजमगढ के सिधारी स्थित जे पी मेडिकल एजेन्सी पर टी. बी. रोग परामर्श केन्द्र चला रहे हैं। दोपहर 2 बजे से रात्रि तक गरीबों को नि: शुल्क परामर्श देते रहते हैं। इस दौरान कोई मरीज गरीबों की सेवा को आगे बढ़ाने को इलाज के बाद पैसे दिए तो उससे इंकार भी नहीं करते है। उनका कहना है कि गांवों में आज भी बहुतेरे परिवार गरीबी के कारण इलाज नहीं करा पाते हैं। उनकी मजबूरी कई बार उनके जीवन पर भारी पड़ जाती है।

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