
ग्रामीणों का आरोप है कि जिस स्थान पर झंडारोहण किया गया, वहां न तो झंडे के लिए कोई स्थायी व्यवस्था थी और न ही फूल, डोरी अथवा रस्सी जैसी आवश्यक तैयारियां की गई थीं। ग्रामीणों ने इसे तिरंगे का अपमान बताते हुए योगी सरकार में भी ऐसी अव्यवस्था को शर्मनाक करार दिया।
घटना से आहत गांव के बुजुर्गों और युवाओं ने पंचायत भवन की बदहाल स्थिति का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर वायरल किया, जिससे मामला चर्चा में आ गया। ग्रामीणों का कहना है कि गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व पर इस तरह की लापरवाही बेहद निंदनीय है।
इस मुद्दे को लेकर गांव के सम्मानित एवं सामाजिक व्यक्ति डॉ. ताहा खान और देवेंद्र यादव ने पंचायत भवन की बदहाली पर सवाल उठाए और मांग की कि पंचायत स्तर पर जिम्मेदार और संवेदनशील लोगों को तैनात किया जाए, जो राष्ट्रीय ध्वज और सरकारी संपत्तियों का सम्मान करें। साथ ही उन्होंने पंचायत भवन पर ग्रामीणों के लिए सभी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग की।
ग्रामीणों ने प्रशासन से मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई की मांग की है।

