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हुजूर हाफिज-ए-मिल्लत ने मानवता का पढ़ाया उनहोने इन्सानियत का बड़ा योगदान दिया-मौलाना बदरे आलम मिस्बाही

संवाददाता शरफुद्दीन आज़मी

मुबारकपुर आजमगढ़
हाफिजे मिल्लत के दो दिवसीय सालाना उर्स के आज दुसरे दिन जुमले की नमाज बाद 3,00बजे मौलाना बदरे आलम मिस्बाही ने पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि हुजूर हाफिज मिल्लत का नाम अब्दुल अजीज मोहद्दिस और वे मुरादाबाद जिले के भोजपुर के रहने वाले थे।वह मुबारकपुर में संस्थान की स्थापना किए जहां हर तरह की शिक्षा दी जाती है।इस धार्मिक शिक्षण संस्थान में जो शिक्षा हासिल करता है वह एक नेक सच्चा नागरिक बनता है। मजहब इस्लाम मानवता का पाठ पढ़ाता है।यही पैगाम हुजूर हाफिज-ए-मिल्लत ने भी दिया। उन्होने आगे यह भी कहा कि अरबी यूनिवर्सिटी अल जामियातुल अशरफिया मुबारकपुर के वह संस्थापक हैं। वह ईल्म का बाग लगा कर लोगों को इससे लाभ पहुंचाने का काम किया। उनके निधन के बाद उन्हे यहीं परिसर में दफन किया गया। आज मानो वह अपने ही हाथ से लगाये हुए बाग में सो रहे हों।उनकी मजार पर हर वर्ष उर्स पाक का आयोजन होता है।यहां बाहर विदेश भी जायरीन भारी संख्या मेंआते हैं।उर्स पाक में यहां से फारिग छात्रों की दस्तार बांधी जाती है।मौलवी, आलिम, फाजिल हाफिज कारी की सनद देकर उन्हे सम्मानित किया जाता है।

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