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Azamgarh भारी सुरक्षा के बीच कोर्ट में पेश हुआ माफिया अखण्ड प्रताप सिंह

आजमगढ़: बरेली जेल में निरुद्ध माफिया अखंड प्रताप सिंह गैंगस्टर के मामले में मंगलवार को गैंगस्टर कोर्ट में पेश हुआ. भारी गहमागहमी के बीच कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में बुलेट प्रूफ जैकेट पहनाकर अखंड प्रताप सिंह को कोर्ट में पेश किया गया. इस मामले में अगली सुनवाई 9 जनवरी को होगी.
शासकीय अधिवक्ता संजय द्विवेदी ने बताया कि अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ तरवां थाने में गैंगेस्टर का एक मामला था. इसमें दो अभियुक्त थे. एक अभियुक्त की आरोप पत्र प्रेषित होने से पहले ही मौत हो गई और दूसरा अभियुक्त अखंड प्रताप सिंह है. उन्होंने बताया कि इस मामले में कुल 24 साक्षी थे. इनमें से पांच को परीक्षित कराया गया. मामले में अखंड प्रताप सिंह को बरेली जेल से तलब किया गया था. इस मामले में अब अगली तारीख 9 जनवरी को होगी. बताया कि अखंड प्रताप सिंह ने कोर्ट में दवा और खाना खिलाने की व्यवस्था की मांग की, जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया.

बता दें कि 11 मई 2013 को वाराणसी में ट्रांसपोर्ट का व्यवसाय करने वाले व मेंहनगर क्षेत्र के टोडरपुर ग्राम निवासी धनराज यादव (35) पुत्र सत्यदेव की स्कार्पियो सवार हमलावरों ने उस समय गोली मारकर हत्या कर दी, जब वह अपने बड़े भाई सहित चार लोगों के साथ नरायनपुर गांव स्थित रिश्तेदारी से घर लौट रहे थे. इस मामले में मृतक के भाई बच्चेलाल यादव ने तरवां क्षेत्र के पूर्व ब्लॉक प्रमुख अखंड प्रताप सिंह सहित नौ लोगों के खिलाफ नामजद रिपोर्ट दर्ज कराई गई. बाद में इसी मामले में अखंड प्रताप सिंह सहित दो लोगों के खिलाफ गैंगस्टर की कार्रवाई की गई थी. पुलिस के बढ़ते दवाब के कारण अखंड प्रताप सिंह ने 12 दिसंबर 2019 को आजमगढ़ के गैंगस्टर कोर्ट में सरेंडर कर दिया था. उस समय उनके ऊपर पुलिस ने ढाई लाख रुपये का इनाम घोषित किया था.
जिले के तरवा थाना क्षेत्र के जमुआ गांव के रहने वाले माफिया अखंड प्रताप सिंह के खिलाफ 36 से ज़्यादा हत्या, हत्या के प्रयास, लूट, रंगदारी जैसे संगीन मुकदमे दर्ज हैं. वह 2017 के विधानसभा चुनाव में अतरौलिया विधानसभा सीट से बसपा प्रत्याशी भी रहा है. अखंड प्रताप सिंह चुनाव में पैरोल पर छूटा था और तभी से फरार चल रहा था. लेकिन, पुलिस के बढ़ते दवाब के कारण 12 दिसंबर 2019 को कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया था. तभी से वह जेल में निरुद्ध है. पहले आजमगढ़ के कारागार में उसे रखा गया था. बाद में बरेली जेल स्थानांतरित कर दिया गया था.

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