मुगलसराय: इस्लामपुर अखाड़े के उस्ताद साजिद इमाम ने प्रशासन की नई गाइडलाइन का किया स्वागत, बोले– सुरक्षा के लिए जरूरी कदम
डीडीयू नगर (मुगलसराय)। मोहर्रम की तैयारियों के बीच अलीनगर थाना क्षेत्र के इस्लामपुर गांव से एक सकारात्मक संदेश सामने आया है। इस्लामपुर अखाड़े के उस्ताद साजिद इमाम ने प्रशासन द्वारा जारी नई गाइडलाइन का स्वागत करते हुए इसे सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण और समयानुकूल निर्णय बताया है।
उस्ताद साजिद इमाम ने कहा कि प्रशासन की ओर से जारी दिशा-निर्देश पहले ही लागू हो जाने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि इस बार हथियारों, विशेषकर तलवार जैसे धारदार हथियारों के प्रदर्शन पर नियंत्रण से बच्चों और आम लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित होगी तथा दुर्घटनाओं की आशंका भी काफी हद तक कम होगी।
उन्होंने बताया कि उनके पिता लंबे समय तक इस्लामपुर अखाड़े का नेतृत्व करते रहे। उनके इंतकाल के बाद अब वह इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस्लामपुर गांव में ताज़िया नहीं रखी जाती, बल्कि यहां से केवल मोहर्रम का पारंपरिक जुलूस निकाला जाता है।
साजिद इमाम के अनुसार, मोहर्रम के दस दिनों तक गांव में पारंपरिक खेलों का आयोजन किया जाता है। दसवीं मोहर्रम को जुलूस के दौरान छोटे खेल, डंडा और फना-बाजी का प्रदर्शन किया जाता है, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहते हैं।
उन्होंने बताया कि अखाड़े का जुलूस इस्लामपुर से निकलकर मदरसे के रास्ते लोको कॉलोनी होते हुए चौमानी तिराहे तक पहुंचता है। वहां पारंपरिक खेलों का प्रदर्शन किया जाता है, जिसके बाद जुलूस शांतिपूर्वक संपन्न हो जाता है और सभी लोग अपने-अपने घर लौट जाते हैं।
अखाड़े के संचालन में युवा सदस्यों अरमान मंसूरी, सूजी, नानू, जीशान और इरशाद, साहिल की सक्रिय भूमिका रहती है। वहीं वरिष्ठ सदस्यों जुगनू, आफताब उर्फ राजू, शिबलु सहित अन्य लोग भी व्यवस्थाओं में सहयोग करते हैं। इस दौरान वार्ड नंबर 10 के सभासद वकार, जाहिद और बल्ला भाई भी मौजूद रहकर आयोजन में सहयोग करते हैं।
अंत में उस्ताद साजिद इमाम ने कहा कि मोहर्रम का मूल उद्देश्य आपसी भाईचारा, अनुशासन और परंपराओं का सम्मान बनाए रखना है। उन्होंने सभी लोगों से प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण माहौल में मोहर्रम मनाने की अपील की।
