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Azamgarh DM ने जिला अस्पताल का किया निरीक्षण,निरीक्षण के दौरान कहा सब कुछ ठीक

जिले के मुखिया ने निरीक्षण के दौरान कहा सब कुछ ठीक है, दुर्व्यवस्थाओं पर नहीं पड़ी नजर।

इलाज न होने पर पीड़ित ने निरीक्षण के दौरान की शिकायत।

दवा स्टोर में लगी लिस्ट में 286 दवाएं मौके पर 225 ही इंचार्ज को दिए निर्देश।

20 मिनट के इंतजार के बाद इमरजेंसी कक्ष में चालू हुआ ऑक्सीजन रेगुलेटर, नहीं चालू कर पाए स्वास्थ्यकर्मी।

अपनी शिकायतों को लेकर पीछे-पीछे भागते नजर आए मरीज व उनके तीमारद

आजमगढ़। मंडलीय जिला अस्पताल में गुरुवार को जिलाधिकारी के औचक निरीक्षण से स्वास्थ्य कर्मियों में हडकंप मच गया। आपातकालीन कक्ष, स्टोर रूम, सीटी स्कैन ओपीडी सहित अन्य वार्डो का निरीक्षण किया। निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी महोदय ने सब कुछ ठीक-ठाक बताया।
जिलाधिकारी विशाल भारद्धाज सुबह जिला अस्पताल पहुंचे तो पहले इमरजेंसी कक्ष में दवा की उपलब्धता के साथ-साथ आने वाले मरीजो को त्वरित उपचार के बारे में जानकारी ली जबकि वही वार्ड के बाहर रखे आक्सीजन सिलेंडर के पास पहुंचे और स्वास्थ्य कर्मियों से आक्सीजन चालू करने को कहा तो वही आक्सीजन सप्लाई को चालू करने नाकाम रहे लगभग 20 मिनट इंतजार के बाद सप्लाई को चालू किया। जब मरीज को पता चला कि जिलाधिकारी द्वारा निरीक्षण किया जा रहा है तो अपनी अपनी समस्याओं को लेकर उनके पास आए,मुबारकपुर के गजहड़ा गांव निवासी काजल
ने बताया कि चार दिन से भर्ती मरीज का इलाज नही हो रहा है। शिकायत मिलने पर एसआइसी को निर्देशित किया तब जाकर उसका उपचार हो सका।
दवा स्टोर रुम में पहुंचकर दवा के लिस्ट के बारे में जानकारी ली तो पता चला कि कुल 286 प्रकार की दवाएं लिस्ट में उपलब्ध है जबकि मौके पर 225 प्रकार की ही दवाएं उपलब्ध थी। कारण पूछने पर स्टोर इचार्ज बताने में असर्मथता जताई। ओपीडी में निरीक्षण के दौरान नेत्र सर्जन डॉक्टर चंद्रहास नदारत मिले।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी की नजर वहां नहीं पड़ी जहां मरीजों के जीवन के साथ खिलवाड़ हो रहा था। जिला अस्पताल में इन दिनो लगभग दो करोड़ की लागत से अग्निशमन केंद्र स्थापित करने का काम चल रहा है। आग से बचाव के लिए हर वार्ड में पाइप लाइन दौड़ाई जा रही है, वार्ड में बेड पर मरीज भर्ती है और उनके तीमारदार रहते हैं। वार्ड की छत पर वेल्डिंग का काम ठेकेदार द्वारा मिस्त्री से कराया जा रहा है जिसकी चिंगारी भर्ती मरीजों के उपर पड़ रही है वह किसी तरीके से अपना बचाव कर रहे हैं। इस बात पर प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर अमोद कुमार किसी बड़े दुर्घटना के इंतजार में हैं दुर्घटना घटित होने के बाद ही कुम्भकर्णीय नींद से जागेंगे।
ऐसी लापरवाही पर डीएम की नजर नही पड़ी और सब कुछ ठीक-ठाक बता दिया।
इसके बाद सीटी स्कैन पहुंचे तो वही भी लोगो से जानकारी ली। इसके बाद वही ओपीडी के बाहर लोगो की भीड़ देखकर नाराजगी जताते हुए एसआईसी डा.आमोद कुमार को निर्देश दिए कि जो भी कमियां है उसे जल्द से जल्द दुरुस्त करने के लिए किया। हालाकि डीएम ने सब कुछ ठीक ठाक बताते हुए निकल चले गए।
निरीक्षण के बाद जिलाधिकारी के जाते ही ज्यादातर चिकित्सक ओपीडी से नदारत हो गए और एसआइसी भी अपने कार्यालय में मौजूद नहीं थे।
मंडलीय जिला अस्पताल की बात करे तो अनिमित्ताओं का भंडार है, ओपीडी में चिकित्सको के साथ बैठे अनाधिकृत व्यक्ति मरीजों को बाहर से दवा लिखते है, तो वही आपरेशन और इलाज के नाम पर डॉक्टर और उनके दलाल व अनाधिकृत व्यक्ति द्वारा वसुली की जाती है।

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