आजमगढ़। यादव बहुल सीटों पर दलित और ओबीसी वर्ग के प्रत्याशियों को मौका देने की समाजवादी पार्टी की संभावित रणनीति से जुड़ी खबर सामने आने के बाद राष्ट्रीय उलेमा काउंसिल के युवा प्रदेश अध्यक्ष नुरुल हुदा ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि यदि सामाजिक प्रतिनिधित्व की बात हो रही है तो मुस्लिम ओबीसी और मुस्लिम दलित जातियों को भी राजनीतिक भागीदारी में उचित स्थान मिलना चाहिए।
नुरुल हुदा का कहना है कि मुस्लिम समाज के पिछड़े और वंचित तबकों की समस्याओं तथा राजनीतिक प्रतिनिधित्व को लगातार नजरअंदाज किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनका आरोप है कि चुनावी राजनीति में मुस्लिम समाज से समर्थन की अपेक्षा तो की जाती है, लेकिन विभिन्न मुस्लिम पिछड़ी जातियों को प्रतिनिधित्व देने के सवाल पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।
उन्होंने अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि मुस्लिम ओबीसी और मुस्लिम दलित जातियों को नजरअंदाज किया गया तो “2027 में 27 की 27 सीटों पर समेट देंगे”। यह नुरुल हुदा का राजनीतिक दावा है, चुनाव परिणाम का स्वतंत्र पूर्वानुमान नहीं।
नुरुल हुदा इससे पहले भी मुस्लिम पिछड़ी जातियों को ओबीसी सूची में शामिल करने और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का मुद्दा उठा चुके हैं। उन्होंने कहा कि आगामी चुनाव में सामाजिक न्याय और सभी वंचित वर्गों की भागीदारी का मुद्दा महत्वपूर्ण रहेगा।
