उर्स-ए-मीनाई में 20 हाफ़िज़ व 12 कारी की दस्तारबंदी
(संवाददाता हामिद अली)
गोंडा। पूर्वी भारत की मशहूर ख़ानक़ाह दरबार-ए-आलिया मीनाईया और अज़ीम तालीमी इदारा जामिया अमीरुल उलूम मीनाईया में शुक्रवार, 25 सितंबर 2026 को उर्स-ए-मीनाई व जश्न-ए-दस्तारबंदी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम दरबार-ए-आलिया मीनाईया के सज्जादानशीन हज़रत जमाल मीना शाह की सरपरस्ती में आयोजित हुआ। इस दौरान 20 हाफ़िज़-ए-क़ुरआन और 12 क़ुर्रा की दस्तारबंदी व ताजपोशी की गई।
जुमा की नमाज़ के बाद पैग़म्बर-ए-इस्लाम सैयदना हज़रत सरकार-ए-दो-आलम , हज़रत अली, हज़रत इमाम हसन, हज़रत इमाम हुसैन और हुज़ूर ग़ौस-ए-पाक के मूए मुबारक की ज़ियारत कराई गई। इस दौरान बड़ी संख्या में अकीदतमंदों ने ज़ियारत का शरफ़ हासिल किया।
इशा की नमाज़ के बाद जश्न-ए-दस्तारबंदी की महफ़िल का आग़ाज़ तिलावत-ए-क़ुरआन-ए-करीम से हुआ। मुख्य वक्ता हज़रत अल्लामा मुफ़्ती मुहम्मद फ़ुरक़ान मंज़री साहब क़िब्ला, बरेली ने ख़ुसूसी ख़िताब किया। उन्होंने तालीम-ए-क़ुरआन की अहमियत पर रोशनी डालते हुए मुसलमानों को अपने शानदार माज़ी से सबक लेने की ताकीद की। साथ ही सरकार-ए-ग़ौस-ए-आज़म रज़ियल्लाहु अन्हु के फ़ज़ाइल व मरातिब बयान किए। उन्होंने ख़ानक़ाह, मदरसा और मस्जिद के आपसी ताल्लुक़ को भी अहम क़रार दिया।
ख़तीब-ए-हिंद मौलाना मुहम्मद मुज़क्किर ख़ान, उस्ताद जामिया मीनाईया ने क़ुरआन-ए-करीम की रोशनी में औलिया-अल्लाह की शान बयान की। वहीं मुफ़्ती मुहम्मद नईम अमजदी अज़हरी, सदर शोबा-ए-इफ़्ता जामिया मीनाईया ने भी ख़िताब करते हुए शान-ए-ग़ौस-ए-आज़म और हज़रत शाह जमाल मीना की दीनी व मिल्ली ख़िदमात पर रोशनी डाली। उन्होंने तालीमी इदारों के क़याम और उनके फ़रोग़ में निभाई गई अहम भूमिका का भी ज़िक्र किया।
कार्यक्रम में जामिया अमीरुल उलूम मीनाईया के चार होनहार तलबा ने उर्दू, अंग्रेज़ी और अरबी में तक़रीर पेश कर अपनी सलाहियतों का मुज़ाहिरा किया। जनाब हाफ़िज़ नज्मुल हुदा ने निज़ामत के फ़राइज़ अंजाम दिए।
महफ़िल में उस्ताज़ुश्शोअरा हज़रत जावेद सिद्दीक़ी, शायर-ए-अहले सुन्नत हज़रत अंबर मशाहदी, जनाब नूर अहमद वाहिदी और दीगर मद्दाहान ने अपने पुरसोज़ कलाम पेश किए, जिसे सुनकर हाज़िरीन महज़ूज़ हुए।
आख़िर में दुआख़्वानी हुई, जिसमें ख़ानक़ाह, जामिया और मुल्क की तरक़्क़ी व ख़ुशहाली के साथ-साथ पूरी दुनिया के मुसलमानों के लिए ख़ास दुआ की गई।
इस मौक़े पर बाबा फ़क़ीर मोहम्मद क़ारी निसार अहमद मीनाई हज़रत मौलाना सैयद ख़लीक़ अशरफ़ अल्लामा सूफ़ी अब्दुल वहीद, डॉ लायक़ अली ख़ान, क़ारी इलियास मशाहदी, एहसान मीनाई, तबरेज़ आलम और रफ़ीक़ मीनाई समेत जामिया मीनाईया के तमाम असातिज़ा, मस्जिदों के इमाम व शहर के तमाम दानिशमंद एवं बड़ी संख्या में अकीदतमंद मौजूद रहे।
