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बिजली बिना मंडलीय जिला अस्पताल में मचा हाहाकार, ऐसी में स्वास्थ्य कर्मी।

गर्मी से राहत पाने के लिए खाने की प्लेट, एक्स-रे प्लेट, अखबार और गमछे के साथ हाथ के पंखे का लिया सहारा।

एक्स-रे और सोनोग्राफी कराने के लिए आए मरीज घंटो इंतजार के बाद मायूस लौटे।

आजमगढ़, जिला अस्पताल में तो लाखों करोड़ों के बजट आते हैं उसके बाद भी वहां की बिजली व्यवस्था अपाहिज बनी हुई है। बिजली कट जाने के बाद बिजली बाधित न हो इसके लिए दो-दो जनरेटर लगे हुए हैं मगर वह भी अपनी बदहाली पर आंसू बहा रहे हैं। और जिम्मेदारान हाथ पैर हाथ धरे बैठे हुए हैं बिजली न रहने के कारण कई जीवन रक्षक यंत्र बंद हो जाते हैं जिससे मरीजों के जान पर बन आती है। बुधवार के दिन जिला अस्पताल में बिजली के फाल्ट होने से दिन में ही ओपीडी, ओटी और वार्डों में अंधेरा छा गया। जहां वार्डों में भर्ती मरीज व उनके तीमारदार गर्मी से राहत पाने के लिए खाने की प्लेट, एक्स-रे प्लेट, अखबार, गमछा और हाथ के पंखे का सहारा लिया फिर भी गर्मी और उमस से निजात नहीं मिल पा रही थी।
ओपीडी में लाइट न होने से गर्मी और उमस के साथ अंधकार होने से अधिकतर डॉक्टर बैठे ही नहीं और जो डॉक्टर बैठे थे मरीजों के भीड़ के कारण मरीज को देखने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था।
दूर दराज और आसपास से आए मरीज जिनको डॉक्टर द्वारा एक्स-रे और सोनोग्राफी करने के लिए लिखा गया था। वह मरीज एक्स-रे सेंटर और सोनोग्राफी सेंटर के बाहर घंटे बिजली आने का इंतजार करते हुए मायूस लौट गए और जो गंभीर मरीज थे वह निजी सेंटरों का सहारा लिया। सबसे आश्चर्यचकित करने वाली बात की सोनोग्राफी सेंटर में सोनोग्राफी मशीन चलाने के लिए बिजली आने का इंतजार किया जा रहा था पर सोनोग्राफी सेंटर में बैठे स्वास्थ्य कर्मी ऐसी का आनंद उठा रहे थे। वहां मौजूद मरीज और उनके तीमारदारो आश्चर्यचकित थे।
जिला अस्पताल में प्रतिदिन हजार से 1200 मरीजों की ओपीडी होती है मरीज के सुविधा के लिए दो एक्सरे सेंटर है जिसमें एक डिजिटल एक नॉर्मल लगभग प्रतिदिन डॉक्टर द्वारा 200 से ढाई सौ मरीजों को एक्स-रे करवाने के लिए लिखा जाता है। वही लगभग 60 से 80 मरीजों को सोनोग्राफी करवाने के लिए लिखा जाता है।
जिला अस्पताल में विद्युत आपूर्ति को बहाल करने के लिए 125 केवीए और 35 केवीए का जनरेटर लगा हुआ है जिसमें 125 केवीए का जनरेटर काफी दिनों से खराब पड़ा हुआ है। बिजली कट जाने पर जिला अस्पताल के पास कोई तात्कालिक व्यवस्था न होने के कारण गंभीर मरीजों के जान पर बन आती है। बहुत से ऐसे जीवन रक्षक यंत्र हैं जो बिजली से ही चलते हैं बिजली कट जाने पर वह अभी बंद हो जाते हैं ऐसी हालत में मरीजों का जीवन भगवान के ही भरोसे होता है ना की धरती के कहे जाने वाले भगवान के भरोसे, अब किराए के आए हुए जनरेटर से बिजली के कट जाने की समस्या को दूर करने की कोशिश की जा रही है।

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