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चाइनीस मांझा बना किलर मांझा, कई लोगों की चली गई है जान।

आजमगढ़ चाइनीस मांझा की वजह से कितने पशु पक्षी और इंसान घायल हो चुके हैं और अपनी जान गवा चुके हैं। अभी कुछ दिन पूर्व वहीं चीनी मांझे ने ड्यूटी पर जा रहे एक सिपाही की ले ली जान।

शाहजहांपुर जिले में चाइनीज मांझे ने ड्यूटी पर जा रहे एक पुलिसकर्मी की जान ले ली। सिपाही की गर्दन चाइनीज मांझे से कट गई, जिससे मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। सिविल लाइन में तैनात शाहरुख हसन शनिवार को बाइक से ड्यूटी पर जा रहे थे. इसी दौरान चौक कोतवाली क्षेत्र के अजीजगंज में अचानक पुलिसकर्मी की गर्दन अचानक चाइनीज मांझे की चपेट में आ गई. वहीं, दूसरी तरफ से पतंगबाज मांझे को तेजी से खींच रहा था. जिससे सिपाही की अचानक गर्दन कट गई और मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
मृतक के परिवार के लोगों ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से वीडियो प्रसारित की है। अधिकारियों से हाथ जोड़कर निवेदन किया कि चाइनीज माझे की बिक्री पर प्रतिबंध लगाए। चाइनीस मांझे की वजह से कितने पशु पक्षी और इंसान अपनी जान गंवा चुके हैं। मकर संक्रांति आते ही आसमान में रंग-बिरंगे पतंग देखने को मिलने लगते हैं।
मकर संक्रांति के समय लोगों के मन में पतंकबाजी का जिक्र तैर जाता है, कई लोग अपनी पतंक को मजबूत बनाने के लिए मजबूत मांझे का इस्तेमाल करते हैं. उन्हीं में से एक होता है चाइनीज मांझा। पतंगबाजी के शौकीन लोगों ने पतंग उड़ाना शुरू कर दिया है, बाजार भी रंग बिरंगी पतंगों और मांझे से गुलजार हो गया है। चाइनीज मांझा भारत के कई राज्यों में चाइनीज मांझे को बैन कर दिया गया है। कई लोगों को इसकी वजह चीन और भारत के रिश्ते लगते हैं लेकिन इसकी वजह ये नहीं है तो चलिए जानते हैं आखिर चाइनीज मांझे को बैन करने की असल वजह क्या है।
चाइनीज मांझा ज्यादातर प्रदेशों में बैन कर दिया गया है। जिसकी वजह इसकी खतरनाक शैली है, दरअसल ये मांझा इतना खतरनाक होता है कि इससे हर साल कई लोगों की जान चली जाती है और कई लोग घायल हो जाते हैं। इसकी वजह से इसके इस्तेमाल को बंद करने के लिए कहा जाता है लेकिन लोग इस बात को अमल में नहीं लाते इसलिए इसपर बैन लगाया जाता है।
चाइनीज मांझे को कुछ लोग प्लास्टिक का मांझा भी कहते हैं। ये प्लास्टिक का मांझा या कहें चाइनीज मांझा दूसरे मांझों की तरह धागों से तैयार नहीं किया जाता, बल्कि इसे नायलॉन और मैटेलिक पाउडर से बनाया जाता है। ये मांझा प्लास्टिक की तरह लगता है और स्ट्रेचेबल होता है, ऐसे में जब हम इस मांझे को खींचते हैं तो ये टूटने की बजाय और बड़ा हो जाता है। इस मांझे को काटना भी काफी मुश्किल होता है।
ये चाइनीज मांझा मानसून के दौरान भी खराब नहीं होता है। मेटल युक्त इस मांझे से करेंट लगने का भी खतरा होता है। चाइनीस मांझा से घरों में बिजली गुल होने का खतरा बढ़ जाता है। रेलवे लाइन पर यह चाइनीज मांझा गिरता है तब भी सप्लाई में बहुत बाधा आती है।
भारत में चाइनीज मांझे को किलर मांझा भी लोग कहते हैं क्योंकि एक बार ये किसी के गर्दन या पक्षी के पंखों पर लग जाये तो काट देता है। चीनी मांझे में 5 तरह के केमिकल और कई धातुओं का प्रयोग होता है।
इसीलिए पतंग उडाने वाले बच्चे या लोग इसे पसंद करते हैं। वहीं कल तक ये मांझा चाइना से आया करता था। जबकि अब ये मांझा भारत में भी बनने लगा है। चाइनीस मांझा अब तक कितने पशु पक्षी और इंसान घायल हो चुके हैं अपनी जान गंवा चुके हैं। प्रतिबंध के बावजूद भी यह चाइनीस मांझा धड़ल्ले से और आसानी से लोगों को उपलब्ध हो जाता है।

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