अखिलेश दुबे के करीबी सीओ ऋषिकांत शुक्ला 100 करोड़ से अधिक संपत्ति एकत्रित करने के मामले में निलंबित कर दिए गए है। उनके खिलाफ विजिलेंस की जांच भी शुरू हो गई है। उन पर कानपुर में तैनाती के दौरान लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाकर संपत्ति अर्जित करने के आरोप लगे थे। एसआईटी जांच में 12 स्थानों पर 92 करोड़ से अधिक की संपत्ति मिलने की पुष्टि हुई थी। साथ ही तीन अन्य संपत्तियां भी हैं। सोमवार को शासन ने प्रमुख सचिव, सतर्कता विभाग को कार्रवाई की है। कानपुर पुलिस कमिश्नर ने 10 और 15 सितंबर को अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन को पत्र भेजकर जांच रिपोर्ट सौंपी थी। इसी पत्र के आधार पर 18 सितंबर को अपर पुलिस महानिदेशक, प्रशासन ने शासन में यह पत्र भेजा था। पुलिस कमिश्नर की ओर से भेजे गए पत्र में इस बात का उल्लेख किया गया था कि वर्तमान में मैनपुरी के भौगांव में तैनात ऋषिकांत करीब-करीब 10 साल से अधिक कानपुर नगर में तैनात रहे हैं। वह यहां वर्ष 1998 से 2006 तक तथा दोबारा दिसंबर 2006 से वर्ष 2009 तक नियुक्त रहे हैं।कानपुर में अखिलेश दुबे गिरोह चलाकर फर्जी मुकदमे कराकर लोगों को फंसाने और वसूली और कब्जे का कार्य करता है। इस गठजोड़ में पुलिस, केडीए और अन्य विभागों के लोग शामिल हैं। ऋषिकांत भी अखिलेश दुबे के करीबी हैं। इस घनिष्ठता एवं अखिलेश के परिजनों की विभिन्न प्रापर्टी में इनकी भागीदारी है। एसआईटी की जांच व सत्यापन में ऋषिकांत शुक्ला द्वारा स्वयं, अपने परिवारीजन, साथियों व साझेदारों के साथ करीब 100 करोड़ की अकूत संपत्ति अर्जित करने की पुष्टि हुई है।12 स्थानों पर उपलब्ध संपत्ति करीब 92 करोड़ की है, जबकि तीन अन्य स्थानों पर उपलब्ध संपत्तियों के अभिलेख उपलब्ध नहीं हैं। हालांकि, गोपनीय सूचनानुसार वह भी शुक्ला के पैन से जुड़े हैं। जांच में आर्यनगर में 11 दुकानें होने की बात सामने आई है जो इनके पड़ोसी साथी देवेंद्र दुबे के नाम पर हैं, हालांकि यह ऋषिकांत की बेनामी संपत्ति है।

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