निजीकरण का रास्ता खोलने का आरोप, बिल वापस लेने की मांग
आजमगढ़।
प्रस्तावित इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 के विरोध में मंगलवार को उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों ने व्यापक प्रदर्शन, धरना और विरोध सभाएं आयोजित कीं। आजमगढ़ में भी विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले बिजली कर्मचारियों ने विरोध दर्ज कराया और सरकार से बिल वापस लेने की मांग की।
संघर्ष समिति के संयोजक प्रभु नारायण पांडेय “प्रेमी” ने बताया कि यह प्रदर्शन नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लॉइज एंड इंजीनियर्स (NCCOEEE) के आह्वान पर आयोजित किया गया। देश के विभिन्न राज्यों के बिजलीघरों, ट्रांसमिशन केंद्रों, वितरण कार्यालयों और जिला मुख्यालयों पर कर्मचारी बड़ी संख्या में एकत्र हुए और प्रस्तावित बिल का विरोध किया।
ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन (AIPEF) के चेयरमैन शैलेन्द्र दुबे ने कहा कि इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 का उद्देश्य बिजली वितरण के क्षेत्र में निजीकरण को बढ़ावा देना है, जिससे सार्वजनिक बिजली व्यवस्था कमजोर होगी। उन्होंने कहा कि इस बिल का सीधा असर किसानों, घरेलू उपभोक्ताओं और बिजली कर्मचारियों पर पड़ेगा।
उन्होंने बताया कि प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार अगले पांच वर्षों में क्रॉस-सब्सिडी समाप्त होने से कृषि उपभोक्ताओं के बिजली दरों में भारी वृद्धि हो सकती है। इससे किसानों की उत्पादन लागत बढ़ेगी और ग्रामीण क्षेत्रों में संकट गहरा सकता है। साथ ही निजी कंपनियां घाटे वाले क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति से बच सकती हैं, जिससे गांवों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है।
संघर्ष समिति ने यह भी कहा कि एक ही क्षेत्र में एकाधिक वितरण लाइसेंस देने की व्यवस्था से निजी कंपनियां केवल अधिक भुगतान करने वाले उपभोक्ताओं को चुनेंगी, जबकि घाटे वाले उपभोक्ता सरकारी कंपनियों के पास रह जाएंगे। इससे सार्वजनिक वितरण कंपनियां आर्थिक रूप से कमजोर हो सकती हैं।
कर्मचारी नेताओं ने कहा कि बिल लागू होने पर हजारों बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों की नौकरी और सेवा शर्तों पर खतरा पैदा हो सकता है। साथ ही केंद्र सरकार के अधिकार बढ़ने से राज्यों की स्वायत्तता भी प्रभावित होगी।
संघर्ष समिति ने सभी राजनीतिक दलों के सांसदों से अपील की है कि वे संसद में इस बिल का विरोध करें और किसानों, उपभोक्ताओं तथा बिजली कर्मचारियों के हितों की रक्षा करें। साथ ही इलेक्ट्रिसिटी (संशोधन) बिल 2025 को तत्काल वापस लेने की मांग की।
