मदरसा इमदादुल उलूम कोपागंज में शोक सभा आयोजित,

मृतक के आत्मा की शान्ति (बखशिश) हेतु की गयी प्रार्थना
नेक दिल व गरीब प्रवर इंसान थे मौलाना:- अरशद रेयाज़

हर नफ्स को मौत का मज़ा चखना है, करें नेक कामः- कारी यासीन
कोपागंज देवेंद्र कुशवाहा

मऊ। मौलाना असरारुलहक कासमी अध्यापक मदरसा इमदादुल उलूम का बिते बुधवार को आकस्मिक निधन हो गया। उनके मृत्यु पर आज मदरसा इमदादुल उलूम कोपागंज में एक शोक सभा (ताज़ियती मीटिंग) का आयोजन किया गया। जिसमें मौलाना असरारुलहक कासमी को खिराज-ए-अकीदत पेश की गयी। उक्त शोक सभा में मदरसा इमदादुल उलूम के सदर व कोपागंज के चेयरमैन प्रतिनिधि अरशद रेयाज़ व मदरसे के नाज़िम-ए-आला कारी यासीन समेत, मदरसे के सभी अध्यापकगण, बच्चे व कस्बे के संभ्रान्त लोगों ने उपस्थित होकर अल्लाह से उनकी बखशिश (आत्मा की शान्ति) एवं उनके गमज़दह अहल-ए-खाना (शोकाकुल परिवार) को कष्ट सहन करने की शक्ति प्रदान करने हेतु प्रार्थना की। शोक सभा को सम्बोधित करते हुए मदरसे के सदर अरशद रेयाज़ ने कहा कि मौलाना असरारुल हक कासमी रह0 एक नेक दिल व गरीब प्रवर इंसान थे, उन्होने लगभग 35 साल मदरसे को अपनी खिदमात दी। उनके निधन से मदरसे को अर्पूणनीय क्षति पहुंची है।
मदरसा इमदादुल उलूम के नाज़िम ए आला कारी यासीन ने कहा कि हर नफ्स को मौत का मज़ा चखना है। मौत से किसी को घबराना नहीं चाहिये। मौत का कोई वक्त मुकर्रर नहीं है वह किसी भी वक्त आ सकती है। इसलिये कहा गया है कि मौत से पहले हर इंसान को मौत की तैयारी कर लेनी चाहिये।
उक्त शोक सभा मे मौलवी अबरार अहमद, कारी बाउद्दीन, मौलवी मोबीन, मास्टर अफज़ाल, मास्टर तौकीर, मास्टर खलीक, मास्टर शमशाद, मौलवी शकीलुर्रहमान आदि ने भी मौलान के प्रति खिराजे अकीदत पेश किया, तथा सभी ने कुरआन व हदीस के रौशनी में अपनी बात रखी।

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