आजमगढ़ में अवैध प्लाटिंग का नेटवर्क! जेई पर मिलीभगत के आरोप, हरवंशपुर से हथिया गांव तक नियमों को ताक पर रखकर भूखंडों की बिक्री
कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति का आरोप, विकास प्राधिकरण के जेई पर अवैध प्लाटिंग करने वालों को संरक्षण देने और अधिकारियों को गुमराह करने के आरोप
आजमगढ़। जनपद में अवैध प्लाटिंग का कारोबार लगातार विस्तार करता दिखाई दे रहा है। एक ओर आजमगढ़ विकास प्राधिकरण द्वारा समय-समय पर अवैध निर्माण और प्लाटिंग के खिलाफ अभियान चलाकर कार्रवाई किए जाने के दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी ओर शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर बिना स्वीकृति प्लाटिंग होने के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है, जबकि जमीनी स्तर पर अवैध प्लाटिंग का खेल बेखौफ जारी है।
सूत्रों के अनुसार हरवंशपुर, करतारपुर, बाईपास रोड, रोडवेज क्षेत्र तथा सदर तहसील के हथिया गांव समेत कई इलाकों में बिना आवश्यक अनुमति और स्वीकृत ले-आउट के जमीनों को छोटे-छोटे भूखंडों में विभाजित कर बेचा जा रहा है। आरोप है कि कई स्थानों पर विकास प्राधिकरण के निर्धारित मानकों की अनदेखी करते हुए मात्र 6 से 14 फीट चौड़े रास्ते बनाकर प्लाटिंग की जा रही है, जबकि नियमानुसार सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं का प्रावधान आवश्यक होता है।
हथिया गांव बना चर्चा का केंद्र
सदर तहसील क्षेत्र का हथिया गांव इन दिनों सबसे अधिक चर्चा में है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि यहां एक साथ कई प्लाटिंग परियोजनाएं संचालित की जा रही हैं, लेकिन मौके पर विकास प्राधिकरण के मानकों के अनुरूप कोई व्यवस्था दिखाई नहीं देती। ग्रामीणों का कहना है कि संबंधित लोग अधिकारियों को यह बताकर गुमराह कर रहे हैं कि जमीन निजी है और केवल व्यक्तिगत उपयोग के लिए रास्ता बनाया जा रहा है, जबकि मौके की स्थिति व्यावसायिक प्लाटिंग की ओर संकेत करती है।
सूत्रों का दावा है कि जिस मार्ग को निजी रास्ता अथवा सरकारी खड़ंजा बताया जा रहा है, उसके संबंध में न तो किसी सरकारी टेंडर की जानकारी सामने आई है और न ही किसी अधिकृत निर्माण कार्य की पुष्टि हो सकी है। इसके बावजूद रास्ते का निर्माण और विकास कर उसे वैध स्वरूप देने का प्रयास किया जा रहा है।
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*विकास प्राधिकरण के जेई पर गंभीर आरोप*
स्थानीय लोगों और सूत्रों के बीच सबसे अधिक चर्चा विकास प्राधिकरण के एक जेई की भूमिका को लेकर है। आरोप है कि संबंधित जेई अवैध प्लाटिंग स्थलों की वास्तविक स्थिति उच्च अधिकारियों तक पहुंचाने के बजाय उन्हें गुमराह करते हैं। इतना ही नहीं, कुछ लोगों का आरोप है कि कार्रवाई की सूचना पहले ही प्लाटिंग कारोबारियों तक पहुंचा दी जाती है, जिससे मौके पर पहुंचने से पहले ही व्यवस्थाएं बदल दी जाती हैं और कार्रवाई प्रभावहीन हो जाती है।
यह भी आरोप लगाए जा रहे हैं कि शिकायतों के बावजूद कई स्थानों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो रही है। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और संबंधित अधिकारियों का पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
*अनुसूचित जाति की जमीनों के सौदों पर भी उठे सवाल*
ग्रामीणों का आरोप है कि जिन जमीनों पर प्लाटिंग की जा रही है, उनमें कुछ भूमि अनुसूचित जाति वर्ग के लोगों से खरीदी गई है। आरोप है कि कम कीमत पर भूमि खरीदकर उसे छोटे-छोटे प्लाटों में विभाजित कर कई गुना अधिक मूल्य पर बेचा जा रहा है। लोगों ने ऐसे भूमि सौदों और उनसे संबंधित अनुमतियों की जांच की मांग उठाई है।
आखिर विभाग की नजर क्यों नहीं पड़ रही?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि हरवंशपुर, करतारपुर, बाईपास रोड, रोडवेज क्षेत्र और हथिया गांव में बड़े पैमाने पर प्लाटिंग का कार्य चल रहा है तो संबंधित विभागों की नजर अब तक इस पर क्यों नहीं पड़ी। स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक करने तथा दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
