ओबीसी आरक्षण में मुस्लिम पिछड़ी जातियों की हिस्सेदारी सुनिश्चित करने की उठी आवाज, संवैधानिक अधिकारों के लिए संघर्ष का आह्वान
आजमगढ़। बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश समेत देशभर में अति पिछड़ा आयोग के गठन की मांग उठाई गई है। आरयूसी से जुड़े नुरुल हुदा ने कहा कि पिछड़े वर्ग के भीतर सामाजिक एवं आर्थिक रूप से वंचित समुदायों को उनके अधिकारों का समुचित लाभ दिलाने के लिए प्रभावी व्यवस्था आवश्यक है।
नुरुल हुदा ने ओबीसी आरक्षण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि 27 प्रतिशत ओबीसी आरक्षण के भीतर पिछड़ी मुस्लिम जातियों की हिस्सेदारी और प्रतिनिधित्व पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए। उनका आरोप है कि मंडल आयोग के बाद भी मुस्लिम समाज की कई पिछड़ी जातियां आरक्षण का अपेक्षित लाभ हासिल नहीं कर सकी हैं और राजनीतिक एवं सामाजिक मुख्यधारा में उनकी भागीदारी सीमित बनी हुई है।
उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ समाज के सभी पात्र पिछड़े वर्गों तक समान रूप से पहुंचे, इसके लिए जातिवार सामाजिक स्थिति, प्रतिनिधित्व और वास्तविक लाभार्थियों का अध्ययन कराया जाना चाहिए। उन्होंने अति पिछड़े एवं वंचित समुदायों के लिए अलग आयोग गठित करने की मांग की।
नुरुल हुदा ने कहा कि संवैधानिक अधिकारों की जानकारी और उनके लिए संगठित प्रयास समय की आवश्यकता है। उन्होंने पिछड़े वर्ग की मुस्लिम जातियों समेत सभी वंचित समुदायों को अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से आवाज उठाने का आह्वान किया।
उन्होंने अपने संदेश में कहा—
“सहयोग आपका, संघर्ष हमारा। आप का सेवक—नुरुल हुदा, RUC।”
