संतकबीरनगर: अति पिछड़ा महापंचायत रिलायंस होटल खलीला बाद सामाजिक न्याय और समानता की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए दलित मुसलमानों और दलित ईसाइयों को अनुसूचित जाति (SC) का दर्जा देने की पुरजोर मांग उठाई है। इस सिलसिले में RUC के युवा प्रदेश अध्यक्ष Nurul Huda ने मिडिया से बात करते हुए कहा कि संविधान के अनुच्छेद 341 के तहत अनुसूचित जाति की पहचान से जुड़े धार्मिक प्रतिबंध को समाप्त करने की अपील की गई है। महाज के पदाधिकारियों ने कहा कि सामाजिक एवं ऐतिहासिक रूप से वंचित समुदायों को केवल धर्म के आधार पर संवैधानिक लाभों से अलग रखना पूरी तरह अनुचित है। उन्होंने तर्क दिया कि दलित मुस्लिम और दलित ईसाई समाज भी अन्य वंचित वर्गों की तरह ही सामाजिक, शैक्षिक और आर्थिक पिछड़ेपन का सामना कर रहा है, इसलिए उन्हें भी अनुसूचित जाति की सूची में शामिल किया जाना चाहिए।
उन्होंने याद दिलाया कि पूर्व में सिख और बौद्ध समुदायों के वंचित वर्गों को इस सूची में शामिल करके संवैधानिक अधिकार दिए जा चुके हैं, जबकि दलित मुस्लिम और ईसाई समाज आज भी इससे वंचित है। महाज ने इसे समानता, सामाजिक न्याय और भारत की धर्मनिरपेक्षता की मूल भावना से जुड़ा विषय बताया।पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति से मांग की कि इस संदर्भ में आवश्यक संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया जल्द शुरू की जाए। उन्होंने कहा कि इस ऐतिहासिक कदम से पसमांदा समाज के पिछड़े और वंचित वर्गों को मुख्यधारा में आने, बेहतर अवसर प्राप्त करने और प्रगति करने का मार्ग प्रशस्त होगा। महाज ने राष्ट्रपति से इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए उचित और शीघ्र कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
