दिल्ली पुलिस ने महिला डॉक्टर समेत जिन सात लोगों को गिरफ्तार किया है, इस किडनी रैकेट के खुलासे के दौरान जांच में यह पाया गया कि जिन लोगों को पकड़ा गया है, उसमें डॉ. डी. विजया राजकुमारी का निजी सहायक विक्रम सिंह रोगियों की फाइलें तैयार करने में सहायता करता था। रोगी और डोनर का हलफनामा तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता था।

दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा ने भारत व बांग्लादेश में चल रहे अंतरराष्ट्रीय किडनी गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने चार बांग्लादेशियों समेत सात को गिरफ्तार किया है। इनमें आजमगढ़ का मोहम्मद शारिक भी शामिल है।

विक्रम सिंह आरोपियों से प्रति मरीज 20 हजार लेता था। पकड़े गए आरोपियों में रसेल ने अपने एक सहयोगी के रूप में मोहम्मद शारिक का नाम भी बताया। मोहम्मद शारिक डॉ. डी. विजया राजकुमारी से मरीजों का अपॉइंटमेंट लेता था और पैथालॉजिकल टेस्ट करवाता था और डॉक्टर की टीम से संपर्क करता था। मोहम्मद शारिक प्रति मरीज 50 से 60 हजार लेता था।

दो आरोपियों विक्रम सिंह और मोहम्मद शारिक को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार आरोपियों रसेल अहमद, विक्रम सिंह और शारिक ने खुलासा किया कि डॉ. डी. विजया राजकुमारी को इन लोगों द्वारा जाली कागजात के आधार पर किए जा रहे प्रत्येक अवैध कार्य के बारे में पूरी जानकारी थी।

 

मो. शारिक की तलाश में दिल्ली पुलिस 23 जून को जनपद आई थी। लेकिन, वह हाथ नहीं लगा। मोहम्मद शारिक पुत्र कलीम बीएससी मेडिकल लैब टेक्नीशियन का कोर्स किया है। वह दिल्ली में पैथालॉजी का संचालन करता है।

 

क्या बोले पुलिस अधिकारी

मोहम्मद शारिक को गिरफ्तार करने के लिए दिल्ली पुलिस 23 जून को आजमगढ़ आई थी। दिल्ली पुलिस ने बिलरियागंज थाने की पुलिस की मदद मांगी। थाना पुलिस की मदद से दिल्ली पुलिस मोहम्मद शारिक के घर गई लेकिन घर पर वह नहीं मिला। इसके बाद शारिक को दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। शारिक दिल्ली में पैथालॉजी चलाता था। -चिराग जैन, एएसपी ग्रामीण

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