संवाददाता देवेंद्र कुशवाहा 

कोपागंज विकास खण्ड के इंदारा ग्राम सभा में स्थित मऊ-मधुबन शहीद मार्ग के पश्चिम माता शेरावाली का भव्य मन्दिर हर समय भक्ति भजनो आयोजनों से सराबोर रहता है। इस मन्दिर को बन अवध क्षेत्र का एक मात्र प्राचीन मन्दिर होने का गौरव भी हासिल है। यह मंदिर प्राचीन काल से ही स्थापित है सन् 1995 में गांव के शिक्षक स्वर्गीय ओमप्रकाश सिंह के अथक प्रयास से इस मंदिर को दिव्य रूप दिया गया। इस मन्दिर में पुजारी भारत भूषण,सोना दास पूजा-पाठ , आरती, संध्या वंदन आदि करते हैं। स्थापना से ही मन्दिर की मान्यता रही है कि जो भी भक्त माता रानी के चरणों में श्रद्धा भाव व सच्चे मन से शीश झुकाता है उसकी मुराद अवश्य पुरी होती है। यहां नवरात्र भर सुबह शाम आस पास के लोगों का तांता लगा रहता है। सुबह से ही श्रद्धालु पूजन अर्चन में जुटे रहते हैं।देर रात तक भजन कीर्तन होता है यहां आने वाले श्रद्धालुओं की हर मांग को शेरा वाली मां पूरी करती है। दुर्गा मंदिर के दाहिने शिव मंदिर में शिव जी का पुरा परिवार और बायी तरह हनुमानजी का मंदिर स्थापित है। दूर्गा जी मंदिर में भगवान रामचन्द्र जी,सीता जी,लक्ष्मण जी, व श्री कृष्ण व राधा जी की मुर्ती बिराजमान है।लग्न के दिनों में मंदिर पर शादी व्याह भी बड़ी धूमधाम से होता है। नवरात्र के पावन पर पर दूर-दूर से श्रद्धालु इस मन्दिर में दर्शन करने के आते हैं। प्राचीन स्थापना काल से ही इस मन्दिर में कोई भी भक्त जो भी सच्चे मन से मांगता है उसकी मुराद अवश्य पुरी होती है नहर के किनारे एकान्त में स्थापित इस मन्दीर का स्थान बहुत ही मनोरम है। दूर-दूर से लोग यहां दर्शन करने आते हैं माता रानी के दरबार में आज तक जो भी सच्चे मन से आकर शीश नवाया है। माता रानी ने अपने भक्तों कोई कभी निराश नहीं किया है नवरात्र महीने में तो मां दुर्गा की महिमा अपरंपार होती है। मां के चौखट पर मात्था टेकने वाले की मुराद पूरी होती है। यहां महिलाएं मन्नतों के अनुसार कढा़ही भी चढा़ती है। इसके बाद हलुआ पूड़ी मां को चढ़ाती है। नवरात्र में तों भक्तों का सुबह शाम तांता लगा रहता है।लग्न के दिनों में यहां शादी व्याह के भी आयोजन बड़े धूमधाम से होता रहता है।

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