जिला अस्पताल में सेवानिवृत के बाद भी चिकित्सक का पद से नही छूट रहा मोह और माया।

 

आजमगढ़, शासन की मंशा के खिलाफ मानो जिला अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों ने र्मोचा खोल रखा है। बेहतर इलाज का दावा कागजों पर सिमट कर रह गई, आए दिन मरीजों को इलाज में होने वाली परेशानी से अधिकारी सबक नही ले रहे। अस्पताल में एसआइसी पद से सेवानिवृत होने के बाद भी चिकित्सक का अस्पताल से मोह और माया नही छूट रहा है। ऐसे में लोगों को दिन भर अपने मनमाने फरमान का आदेश देते रहते है। इस तरह की बातों से स्वास्थ्य कर्मियों ने नाराजगी जताई है।

मंडलीय जिला अस्पताल में लोगों के बेहतर इलाज के दावे तो दो दिन पूर्व सभी ने देख लिया होगा। मऊ और गाजीपुर जनपद के हादसे में 25 घायलों का किस तरह से इलाज चला सभी को हकीकत पता चल गया। इलाज के अभाव में सभी दूसरे दिन कुछ तो रेफर हो गए तो कुछ बिना बताए चले गए। अस्पताल में स्वास्थ्य कर्मियों की मनमानी के आगे किसी एक की नही चलती है। तीस नंबर को एसआइसी पद से सेवानिवृत हुए डॉक्टर आमोद कुमार मौजूदा समय में भी लोगों को दिशा-निर्देश देते फिरते है। विभाग की माने तो जब एसआइसी पद पर कार्यरत डाक्टर बालचंद प्रसाद है तो वह क्यों स्वास्थ्य कर्मियों पर अपनी तुगलगी फरमान सुनाते है। इतना ही नही अभी कुछ दिन पूर्व ही डाक्टर आमोद पर दो करोड़ रुपये का ओवर बजट का घोटाला भी सामने आया है। हालाकि घोटाले की जांच बनारस एडी को करनी है, अभी तक जांच पूरी नही हुई। लगभग आठ माह से एसआइसी के साथ-साथ एडी का भी पदभार होने के कारण जांच अटक गई। सरकारी कामकाज में भी हस्तक्षेप करने की जानकारी मिली है। एसआइसी डाक्टर बालचंद प्रसाद ने बताया कि डॉक्टर आमोद की तैनाती एनेथिसिया के पद पर हुई है, अब वह किसी प्रसाशनिक पद पर नही है। वह एक बेहोशी के डाक्टर के रुप में जिला अस्पताल में सेवा देंगे।(आजमगढ़ से संवाददाता अबुजैद की खास रिपोर्ट)

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