संवाददाता विष्णु शर्मा
आज़मगढ़ मे तपोस्थली महाऋषि दुर्वाशा धाम मे कार्तिक पूर्णिमा के दिन लाखो की भीड़ मे भी पुलिस प्रशासन कड़ी नजर रखी हुई है| जिसमे कई थाने की पुलिस मौजूद है|
पौराणिक स्थल दुर्वासा में, कार्तिक पूर्णिमा पर श्रद्धालुओं का उमड़ा हुजूम, तमसा-मंजूषा में आस्था की लगाई डुबकी
पौराणिक स्थल दुर्वासा में इस दौरान ठंडक पर आस्था भारी रही। हजारों लोगों ने पवित्र नदी तमसा-मंजूषा में आस्था की डुबकी लगाकर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मेले में दोपहर बाद भीड़ अधिक बढ़ गई। सुरक्षा के तहत मेले को कई भागों में बांटा गया था। मेले में दूरदराज के स्नानार्थियों का पहुंचना एक दिन पहले से ही शुरू हो गया था।महिलाएं सिर पर गठरी लेकर धाम पर मंगलगीत गाती हुई पहुंची। श्रद्धालुओं ने तमसा-मंजूषा के संगम आस्था की डुबकी लगाने के बाद नदी तट के सामने मंदिर में गन्ना, फूल आदि का चढ़ा कर पूजा-अर्चना की। ऋषि दुर्वासा मंदिर और शिवालय के गर्भगृह में दूध और जल से अभिषेक किया गया।श्रद्धालुओं ने स्नान के बाद अन्न और गोदान भी किया । इस दौरान लोगों ने पांच कोसी परिक्रमा भी करते देखे गए, दुर्वासा धाम के मेला समित के अनुसार एक लाख से ऊपर श्रद्धालुओं ने संगम में डुबकी लगाई। पूजा अर्चना के बाद श्रद्धालुओं ने मेले का रुख किया। ग्रामीण इलाकों से आने वाले श्रद्वालुओं ने गृहस्थी के सामानों की खरीदारी की।मेले में मनोरजंन की अच्छी व्यवस्था की गई थी। खजला की दुकानों पर भी भीड़ लगी हुई थी।सर्कस, आसमानी झूला, ब्रेक डांस, जादूगर और मौत का कुआं को देखने के लिए भीड़ लगी थी।मीना बाजार में महिलाओं की काफी भीड़ थी। मेले में सुरक्षा के तहत फूलपुर, सरायमीर, निजामाबाद और अहरौला थानों की पुलिस लगाई गई थी।महिला पुलिस की अलग से व्यवस्था की गई थी ।
कार्तिक पूर्णिमा की बात करें तो
हिंदू धर्म में पूर्णिमा का व्रत महत्वपूर्ण स्थान रखता है। प्रत्येक वर्ष 12 पूर्णिमाएं होती हैं। जब अधिकमास व मलमास आता है तब इनकी संख्या बढ़कर 13 हो जाती है। कार्तिक पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा व गङ्गा स्नान के नाम से भी जाना जाता है। इस पूर्णिमा को त्रिपुरी पूर्णिमा की संज्ञा इसलिए दी गई है क्योंकि आज के दिन ही भगवान भोलेनाथ ने त्रिपुरासुर नामक महाभयानक असुर का अन्त किया था और वे त्रिपुरारी के रूप में पूजित हुए थे।ऐसी मान्यता है कि इस दिन कृतिका में शिव शंकर के दर्शन करने से सात जन्म तक व्यक्ति ज्ञानी और धनवान होता है। इस दिन चन्द्र जब आकाश में उदित हो रहा हो उस समय शिवा, संभूति, संतति, प्रीति, अनुसूया और क्षमा इन छ: कृतिकाओं का पूजन करने से शिव जी की प्रसन्नता प्राप्त होती है। इस दिन गङ्गा नदी में स्नान करने से भी पूरे वर्ष स्नान करने का फल मिलता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन दुर्वाशा धाम मे दुर्वाशा ऋषि का दर्शन करके सब लाखों लोग यहाँ आकर करके पुण्य कमाते है|

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *