आजमगढ़ स्वास्थ्य सेवाओं में बेहतरी को लेकर सरकार लगातार दावे करती रहती है, पर इन दावों के बीच जिला अस्पताल के लावारिस वार्ड की कुछ ऐसी तस्वीरें सामने आईं जिन्हें देखकर रूह कांप जाती है
यहां मरीज का सड़ता जिस्म और इस पर भी उसे समुचित इलाज न दिया जाना सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की पोल खोलता दिखाई देता है
भूख, प्यास, गंदगी के बीच कमरे की छत को देखते हुए मरीजों के जेहन में शायद एक ही सवाल है कि ऐ मौत! आखिर तू आती क्यों नहीं यह स्थिति जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की है
मंडलीय जिला चिकित्सालय के लावारिस वार्ड में भर्ती बुजुर्ग लावारिस मरीज की हालत को देखकर रूह तक कांप जाएगी
जहां इतनी कड़ाके की ठंड में एक आम आदमी ठंड से बचने के लिए गर्म कपड़ों के साथ तरह-तरह के उपाय करता है वहीं जिला अस्पताल के लावारिस वार्ड में भर्ती मरीज को देखकर मानवता भी शर्मसार हो जाएगी
जिला अस्पताल के लावारिस वार्ड का नाम ही लावारिस नहीं है बल्कि अस्पताल प्रशासन की नजर में भी यह वार्ड लावारिस ही है।
मंडलीय जिला चिकित्सालय के लावारिस वार्ड में भर्ती मरीज जंग लगे बेड पर बिना गड्ढे और चादर के और खुली खिड़की से आती सर्द हवाओं में हाड़ कपा देने वाली ठंड में एक मैला चद्दर और एक पतले कंबल में सिकुड़ कर अपने आप को गर्म रखने का प्रयास कर रहा है
दोनों पैर और हाथ के जख्म में पड़े कीड़ो के बिलबिलाने से दर्द से कराह रहा है
हाथ और पैर के जख्मों पर बधी मैली पट्टी बता रही है कि कितना बेहतर इलाज होता होगा
रात के सन्नाटे के बीच भर्ती लावारिस मरीज बाथरूम जाने के लिए पानी पड़े फर्श पर अपने आप को घसीट घसीट कर बड़ी मशक्कत से असहनीय पीड़ा के साथ शौचालय के दरवाजे तक पहुंचते पहुंचने बाथरूम कर देता है
दूसरी सबसे अहम बात भर्ती मरीज की देखभाल ना हो पाने के कारण वार्ड से मरीज निकल कर घसीट घसीट कर बाहर चला जाता है और अस्पताल के बाहर जाकर फर्श पर लेट कर धूप सेक कर अपने आप को गर्म करता है।
बिना मरीज के वार्ड में बेड पर भोजन की थाली और दूध का गिलास रख दिया जाता है भोजन की थाली और दूध का गिलास मरीज का इंतजार करती है।
अस्पताल के हर वार्ड में वार्ड को गर्म करने के लिए हीटर लगा हुआ है वही लावारिस वार्ड में खुली खिड़की से आती सर्द हवाओं और बिना गड्ढे के बेड पर मरीज पड़ा रहता है
जिला अस्पताल में सांसद, विधायक से लेकर उच्च अधिकारियों का निरीक्षण तो होता है पर वह भी लावारिस वार्ड को लावारिस ही समझकर कर चले जाते हैं
वैसे तो बहुत से समाजसेवी संस्था और समाजसेवी लोग हैं जिनका किसी न किसी अवसर और कार्य पर जिला अस्पताल में आना होता है पर उनको भी लावारिस भर्ती मरीजों का दर्द और दुर्दशा दिखाई नहीं देती है।
जिला अस्पताल के लावारिस वार्ड मे भर्ती मरीज जिनके परिजन या तो आते ही नहीं है या परिजन है ही नहीं
अब धीरे-धीरे परिजनों की मानवता खत्म होती जा रही है, इसमें सबसे बड़ी बात यह है कि कई लोग अपने बूढ़े मां बाप को बुजुर्ग होने के बाद अपने स्थिति में छोड़ देते है
लावारिस मरीज सिर्फ अपनी मौत का ही इंतजार कर रहे हैं
