लखनऊ। उत्तर प्रदेश में अपराधियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और तेज न्यायिक प्रक्रिया के तहत अभियोजन निदेशालय ने बीते एक वर्ष (01 अप्रैल 2025 से 31 मार्च 2026) में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।

मिशन शक्ति फेज-5 के अंतर्गत मात्र 20 न्यायालय कार्यदिवसों में 443 मामलों में सजा सुनिश्चित कराई गई। इनमें 3 अभियुक्तों को मृत्युदण्ड, 50 को आजीवन कारावास, 208 को 10 वर्ष या उससे अधिक तथा 476 अभियुक्तों को 10 वर्ष से कम की सजा दी गई।

प्रदेश में चिन्हित 69 माफियाओं में से 10 अपराधियों को 15 मामलों में सजा दिलाई गई। वहीं, जनपदों के टॉप-10 अपराधियों से जुड़े 113 मामलों में 144 अपराधियों को विभिन्न दण्ड दिए गए।

पॉक्सो मामलों में 12 अभियुक्तों को मृत्युदण्ड, 300 को आजीवन कारावास, 1316 को 10 वर्ष या उससे अधिक तथा 1706 को 10 वर्ष से कम की सजा सुनाई गई। खास बात यह रही कि 14 मामलों में एक माह के भीतर ही सुनवाई पूरी कर सजा दिलाई गई।

महिला अपराधों में भी सख्ती बरतते हुए 8 अभियुक्तों को मृत्युदण्ड, 245 को आजीवन कारावास, 678 को 10 वर्ष या उससे अधिक तथा 2689 को 10 वर्ष से कम की सजा दिलाई गई।

नवीन अपराधों में 6 मृत्युदण्ड, 35 आजीवन कारावास, 36 मामलों में 10 वर्ष से अधिक तथा 1174 मामलों में 10 वर्ष से कम की सजा दी गई, जबकि 74,701 मामलों में जुर्माना लगाया गया।

तकनीकी सुधारों के तहत वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अब तक 40,161 गवाहों के बयान दर्ज किए गए, जिससे समय और सरकारी संसाधनों की बचत के साथ मामलों के शीघ्र निस्तारण में मदद मिली है।

इसके अतिरिक्त एससी/एसटी, गैंगस्टर, आयुध, गोवध निवारण, एनडीपीएस जैसे विभिन्न अधिनियमों के हजारों मामलों में अभियुक्तों को सजा दिलाई गई।

अभियोजन विभाग की एक और बड़ी उपलब्धि यह रही कि ई-प्रोसिक्यूशन पोर्टल की फीडिंग में उत्तर प्रदेश लगातार देश में प्रथम स्थान पर बना हुआ है।

वहीं, गिरोहबंद एवं समाज विरोधी गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई के तहत वर्ष 2025 में 805 करोड़ रुपये से अधिक तथा वर्ष 2026 के शुरुआती तीन महीनों में 448 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति कुर्क की गई।

सरकार की सख्त नीति और त्वरित न्याय व्यवस्था के चलते प्रदेश में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में यह बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है।

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