आजमगढ़। बढ़ती महंगाई और पेट्रोलियम पदार्थों के दामों में बेतहाशा वृद्धि के खिलाफ लोकतांत्रिक तरीके से शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे समाजवादी पार्टी के युवा और फ्रंटल संगठनों के कार्यकर्ताओं पर आजमगढ़ पुलिस का दमनकारी चेहरा सामने आया है। सपा कार्यालय से कलेक्ट्रेट चौराहे तक जा रहे शांतिपूर्ण तरीके से कलेक्ट्रेक्ट तक मार्च करते हुए पहुंचे और जैसे ही प्रदर्शनकारियों ने पेट्रोलियम मंत्री भारत सरकार हरदीप सिंह पुरी का पुतला दहन करने का प्रयास किया तब न सिर्फ पुलिस ने बलपूर्वक रोकने का प्रयास किया, बल्कि उनके साथ अभद्रता और धक्का-मुक्की भी की।

​प्रदर्शन के दौरान पुलिस प्रशासन की संवेदनहीनता और नियमों की धज्जियां उड़ाने का एक बड़ा मामला सामने आया है। आरोप है कि मौके पर प्रदर्शन को नियंत्रित करने के लिए एक भी महिला पुलिसकर्मी तैनात नहीं थी। इसी बीच, रोडवेज चौकी इंचार्ज बिना नेमप्लेट पहने अपनी पहचान छुपाते हुए मौके पर पहुंचे और मर्यादा की सारी सीमाएं लांघ दीं।

​सपा युवजन सभा के जिला अध्यक्ष दुर्गेश यादव ने पुलिसिया कार्रवाई पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि रोडवेज चौकी इंचार्ज ने हमें धरने पर बैठने के लिए मजबूर किया। मौके पर कोई महिला पुलिसकर्मी नहीं थी, इसके बावजूद बिना नेमप्लेट के आए चौकी इंचार्ज ने सपा नेत्री शबनम खातून के साथ सरेआम गाली-गलौज की। उनके साथ धक्का-मुक्की करते हुए जबरन कंधे और गर्दन पर हाथ डाला गया, जो कि बेहद शर्मनाक और कानूनन अपराध है।

​इतना ही नहीं पुलिस सपा कार्यकर्ताओं से भी हाथापाई पर उतर आई।

​पुलिस की इस बदसलूकी और अभद्र व्यवहार से आक्रोशित होकर सपा कार्यकर्ता कड़ी धूप की परवाह किए बिना सिविल लाइन चौकी के ठीक सामने कलेक्ट्रेट चौराहे पर धरने पर बैठ गए। प्रशासन के अधिकारियों ने मामले को दबाने और सपाईयों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ता दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की जिद पर अड़े रहे।

​पुलिस की किरकिरी होते देख सीओ सिटी शुभम् तोंदी ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला। उन्होंने आक्रोशित कार्यकर्ताओं और पीड़ित महिला नेत्री को समझाने का प्रयास किया। अंततः, पीड़ित सपा नेत्री शबनम खातून की तहरीर पर दोषी पुलिसकर्मी के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई का लिखित आश्वासन मिलने के बाद ही सपाइयों ने अपना धरना समाप्त किया। ​इस पूरी घटना ने एक बार फिर आजमगढ़ पुलिस की कार्यप्रणाली, प्रदर्शनों को डील करने के उनके अलोकतांत्रिक रवैये और महिला सुरक्षा को लेकर उनके दावों पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।

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