किसानों को बांटे गए केसीसी स्वीकृति पत्र, फसल बीमा व रोग प्रबंधन की दी जानकारी
आजमगढ़:‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत आज दिनांक 29.06.2026 को जिले के अग्रणी बैंक यूनियन बैंक ऑफ इंडिया द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), कोटवा, आजमगढ़ में एक विशेष शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में पल्हनी, रानी की सराय एवं सठियांव विकास खंडों के किसानों ने भाग लिया।
कार्यक्रम में श्री आशीष कुमार, उप निदेशक कृषि, आजमगढ़ मोहम्मद आरिफ, डीडीएम, नाबार्ड एवं डॉ. विमल कुमार, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं अध्यक्ष, केवीके कोटवा मुख्य रूप से उपस्थित रहे। इसके अतिरिक्त यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के वरिष्ठ अधिकारी, बैंक मित्र एवं बड़ी संख्या में महिला स्वयं सहायता समूह की सदस्य समेत किसान भाई-बहन उपस्थित रहे।
शिविर की मुख्य विशेषताएं:
1. वित्तीय समावेशन एवं जोखिम प्रबंधन:अग्रणी जिला प्रबंधक श्री अभिषेक द्विवेदी ने किसानों को केसीसी सैचुरेशन अभियान की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 3 लाख रुपये तक का फसल ऋण मात्र 4% ब्याज दर पर उपलब्ध है। साथ ही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 72 घंटे में क्लेम सूचना देने की प्रक्रिया एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं एपीवाई, पीएमजेजेबीवाई व पीएमएसबीवाई के लाभ बताए।
2. तकनीकी सत्र:उप निदेशक कृषि श्री आशीष कुमार एवं केवीके वैज्ञानिक डॉ. विमल कुमार ने फसल सुरक्षा की आधुनिक तकनीकों, एकीकृत कीट प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य कार्ड के उपयोग एवं खरीफ सीजन में उत्पादकता बढ़ाने के उपायों पर विस्तृत जानकारी दी।
3. मौके पर स्वीकृति पत्र वितरण:गणमान्य अतिथियों द्वारा पात्र किसानों को मौके पर ही केसीसी स्वीकृति पत्र वितरित किए गए, ताकि वर्तमान फसल सीजन के लिए समय से ऋण उपलब्ध हो सके इस अवसर पर उप निदेशक कृषि श्री आशीष कुमार ने कहा,खेत बचाओ अभियान आज समय की मांग है। जब केवीके का कृषि विज्ञान और बैंक का वित्तीय सहयोग एक साथ किसान तक पहुंचेगा, तभी हम वास्तव में खेत को बचा पाएंगे और किसान की आय बढ़ा पाएंगे।”
एलडीएम अभिषेक द्विवेदी ने कहा, _“हमारा लक्ष्य जिले में शत-प्रतिशत केसीसी सैचुरेशन है। बैंक यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि कोई भी पात्र किसान संस्थागत ऋण से वंचित न रहे। बैंक मित्र हर गांव में घर-घर अभियान चलाएंगे।”डीडीएम नाबार्ड मोहम्मद आरिफ ने कहा, _“नाबार्ड एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों को कृषि अवसंरचना बनाने में मदद कर रहा है। किसानों को एआईएफ जैसी योजनाओं का लाभ उठाकर भंडारण व प्रसंस्करण इकाइयां लगानी चाहिए, जिससे फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।”_
शिविर का समापन कृषि विभाग, केवीके, नाबार्ड और बैंकों के बीच समन्वय से किसानों को सम्पूर्ण समाधान उपलब्ध कराने के संदेश के साथ हुआ। यह आयोजन तकनीक और समय पर ऋण के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के लिए चलाए जा रहे जिलाव्यापी अभियान का हिस्सा है।
