आजमगढ़। राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल के राष्ट्रीय सचिव मोहम्मद नसीम ने उपमुख्यमंत्री के कथित बयान पर कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे एक संवैधानिक पद की गरिमा के विपरीत बताया है।

जारी बयान में मोहम्मद नसीम ने कहा कि मदरसों का देश की आजादी और सामाजिक जागरूकता में महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उनका कहना है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अनेक उलेमा और मदरसों से जुड़े लोगों ने अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ संघर्ष किया, जेल यात्राएं कीं और कई स्वतंत्रता सेनानियों ने देश के लिए अपने प्राणों का बलिदान दिया।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान समाज में वैमनस्य पैदा कर सकते हैं और सामाजिक सौहार्द को प्रभावित करते हैं। राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल ने उपमुख्यमंत्री से अपने कथित बयान पर पुनर्विचार करने तथा मुस्लिम समाज से माफी मांगने की मांग की है।

मोहम्मद नसीम ने यह भी आरोप लगाया कि सरकार जनहित के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए धार्मिक विषयों को राजनीतिक बहस का हिस्सा बना रही है।

— मोहम्मद नसीम

राष्ट्रीय सचिव, राष्ट्रीय ओलमा काउंसिल

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