आजमगढ़, जिले के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल में आईडीएच वार्ड जिसे लावारिस वार्ड के नाम से जाना जाता है। उसमें भर्ती मरीज शौचालय में हाथ धोने के लिए लगे बेसिंग के पानी से अपनी प्यास बुझाते के लिए मजबूर हैं। लावारिस वार्ड में मार्ग दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल अज्ञात, मानसिक रूप से बीमार अज्ञात, किसी गंभीर बीमारी के अज्ञात मरीज भर्ती किये जाते हैं। जिनका इलाज और रखरखाव भगवान भरोसे होता है जो अधिकतर लापरवाही और इलाज के अभाव में दम तोड़ देते हैं। जिम्मेदारान अधिकारीयों के कानों में जू तक नहीं रेंगा और भर्ती लावारिस मरीजों का जीवन भगवान भरोसे होता हैं की ना की धरती के कहे जाने वाले भगवान के भरोसे हैं। लावारिस वार्ड में अधिकतर ऐसे मरीज होते हैं जो खुद से ना खा सकते हैं ना पी सकते हैं और ना ही हिल डुल सकते हैं और ना ही अपना दर्द और अपनी बात किसी से बयां कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में वह खाते कैसे होंगे पीते कैसे होंगे और तो और अपनी बात और दर्द किसी को कैसे बया कर पाते होंगे। जहां इलाज और उनके रखरखाव के नाम पर सिर्फ खाना पूर्ति होता है और वह भूख प्यास और इलाज के अभाव में अधिकतर मरीज दम तोड़ देते हैं। उनको दिए जाने वाला भोजन प्लेट में उनके बेड पर रख तो दिया जाता है पर ऐसे ही पड़े पड़े दूसरे दिन उसे फेंक दिया जाता हैं।
मार्ग दुर्घटना में घायल भर्ती 80 वर्षीय महिला प्यास लगने पर वह शौचालय में लगे हाथ धोने के लिए लगे बेसिंग में आ रहे पानी से अपनी प्यास बुझा रही है। अगर इनको भी कोई पूछने वाला होता तो उनकी यह दुर्दशा नहीं होती।
