संवाददाता देवेंद्र कुशवाहा 

जनपद मऊ के कोपागंज नगर पंचायत की ऐतिहासिक रामलीला मंचन के चौथे दिन अयोध्या से पधारे कलाकारों ने गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या उद्धार की कहानी का सजीव मंचन कर दर्शकों को भाव विभोर कर दिया। कलाकारों ने उस मार्मिक घटना का चित्रण किया कि कैसे इंद्र ने अहिल्या के साथ छल किया। इंद्र दरबार में अप्सराओं की नृत्य के दौरान यह बताए जाने पर की तीनों लोकों में गौतम ऋषि की पत्नी अहिल्या से अधिक कोई सुंदर नहीं इस बात की सत्यता जानने के लिए ने देवेंद्र ने जाकर देखा कि अहिल्या वाकई में सुंदरता की प्रति मूर्ति हैं। वह उसके रूप में आशक्त हो उसके साथ संसर्ग करने के लिए गौतम ऋषि का रूप धर कर उसके साथ संसर्ग किया उधर गंगा स्नान कर वापस आकर अपनी पत्नी को पर पुरुष के साथ देख कर कुपित होकर अपनी पत्नी को श्राप दें दिया कि तुमको जिस शरीर व रूप पर गर्व हैं यह शरीर पाषाण पत्थर हो जाए। गौतम ऋषिकेश के श्राप से अहिल्या पाषाण बन गई।करूंण कुंदन से उन्होंने कहां कि मेरा श्राप व्यर्थ नहीं जाएगा। पर इतना अवश्य होगा कि जब नारायण प्रभु श्री राम के रूप में दशरथ के घर जन्म लें कर जंगल में आएँगे तब तुम्हारे इस शरीर को पत्थर योनि से मुक्ति मिलेगी और तुम्हारा उद्धार होगा।

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