मंडलीय जिला अस्पताल में चार दिनों से भर्ती मां को डॉक्टर द्वारा नहीं देखने पर बेटा बैठा धरने पर।
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(संवाददाता अबुज़ैद )
आजमगढ़, मंडलीय अस्पताल में एक तरफ डाक्टरों की उदासीनता तो दूसरी ओर सुरक्षा गार्डों की बदसलूकी और दबंगई से हर कोई परेशान हैं। ऐसा ही नजारा शुक्रवार को दिन में मंडलीय अस्पताल में देखने को मिला। जीयनपुर कोतवाली क्षेत्र के अशरफपुर गांव निवासी 50 वर्षीय हुस्नआरा के पेट में तेज दर्द होने पर परिजनों ने उसे चार दिन पूर्व मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया था। परिजन का आरोप है कि वार्ड में भर्ती मरीज को देखने के लिए कोई भी डॉक्टर नहीं आए। शुक्रवार को सुबह हुस्नआरा का पुत्र राजू अपनी मां को देखने के लिए मंडलीय अस्पताल आया। जब उसे डाक्टर की लापरवाही की जानकारी बेटा को हुई तो वह ओपीडी में पहुंच कर डाक्टर से अपनी मां को देखने के लिए अनुरोध किया। डाक्टर ने वार्ड में जाकर मरीज देखने से मना कर दिया। डाक्टरों की इस व्यवहार से क्षुब्ध होकर राजू मंडलीय अस्पताल गेट के सामने धरने पर बैठ गया। उसके धरने पर बैठते ही वहां तैनात सुरक्षा गार्ड भी आ गए। उन्होंने धरने पर बैठे युवक के साथ अभद्रता करने लगे और जबरन उठाकर वार्ड में लेकर चले गए। राजू का कहना है कि इसके बाद भी शाम तक कोई डाक्टर उसकी मां को देखने के लिए वार्ड में नहीं आया। न ही एसआईसी ने ही कोई पहल की। वहीं अस्पताल में मौजूद अन्य तीमारदारों ने कहा कि अस्पताल में गरीब लोग इलाज के लिए आते हैं। अगर पैसा रहता तो वे प्राइवेट अस्पताल में नहीं जाते। कुछ दिन पूर्व ही जिला अस्पताल में तैनात सुरक्षा गार्ड्स द्वारा एक चाय विक्रेता को बेरहमी से पीटा गया था। उसके रोजी रोजगार के समान को उठाकर फेंक दिया गया था। पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। वहीं धरने पर बैठे युवक की खबर कवरेज कर रहे मीडिया कर्मियों के साथ भी सुरक्षा गार्ड्स द्वारा अभद्रता की।
यह भी लोगों में चर्चा खूब है कि जिला अस्पताल के मुखिया का पदभार ग्रहण करने वाले मुखिया का कार्य कुछ दिन पूर्व सेवानिवृत्ति हो चुके मुखिया कर रहे हैं और वर्तमान मुखिया पूर्व मुखिया के हुक्म का पालन करते हुए उनके पीछे-पीछे टहलते हैं। सेवानिवृत हो चुके मुखिया के मन और दिल से पद का मोह और माया नहीं गया है। लोगों से यह कहावत खूब सुनी जा रही है कि अंधेर नगरी चौपट राजा।
