डीएनबी कोर्स के निरीक्षण के दौरान इमरजेंसी कक्ष में लगाई गई थी मॉनिटर।

आजमगढ़, जिला अस्पताल में इन दिनो मरीजों पर आफत आने जैसी बात है, कही स्वास्थ्य कर्मी तो निगरानी के लिए तैनात गार्ड द्वारा लोगों के लिए मुशीबत बन रहे है। पाँच दिन पूर्व डीएनबी कोर्स के लिए जांच में आए बीएचयू के अधिकारियों को दिखावा दिखाने के लिए इंचार्ज द्वारा वेंटिलेटर और मानिटर लगाया गया था। उनके निरीक्षण के बाद स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा हटा दिया गया। अस्पताल की इस व्यवस्था को मरीज के साथ-साथ जिसने भी देखा वह आश्चर्यचकित रह गए।
मंडलीय जिला अस्पताल को डीएनबी कोर्स की शासन से मंजूरी मिली है। समय-समय पर अधिकारियों द्वारा उसकी जांच रिपोर्ट शासन को भेजी जाती है। हालाकि डीएनबी कोर्स के इंचार्ज डॉ वीके श्रीवास्तव व अन्य चिकित्सक अस्पताल की कमियां छुपाने के लिए जांच में आए अधिकारियों के सामने कुछ और ही दिखाते है। जिससे जांच अधिकारियों को यह लगे की अस्पताल की सारी व्यवस्थाएं चुस्त दुरुस्त हैं। इसके कारण अधिकारियों को अस्पताल की कमियां नजर आती है और सब कुछ ठीक कर लिया जाता है। फोटो में निरीक्षण के दौरान जांच अधिकारी जिस मरीज से हाल-चाल ले रहे हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि डीएनबी इंचार्ज और अस्पताल के स्वास्थ्य कर्मियों द्वारा उस मरीज को अति गंभीर होना दिखाकर जांच अधिकारी को मरीज से रूबरू कराया जा रहा है। इमरजेंसी के वार्ड में मरीज के सिरहाने पीछे दीवार पर मॉनिटर लगाया गया है जिससे सारी जांच प्रक्रिया चल रही है और जांच अधिकारी मरीज की गंभीरता को देखते हुए मरीज से उसकी हाल-चाल जान रहे हैं। अब जांच अधिकारी को क्या पता कि उनके जाते ही सारी दिखाई गई व्यवस्था नदारत हो जाएगी। हाल ही में जिला अस्पताल के इमरजेंसी की मंजूरी मिलने पर बीएचयू के प्रोफेसर डॉ पुष्कर रंजन जांच करने पहुंचे तो इंचार्ज द्वारा वेंटिलेटर और मानिटर युक्त इमरजेंसी दिखाई गई। जबकि अस्पताल में छह साल से वेंटिलेटर के अभाव में आए दिन मरीजों को जान गवानी पड़ रही है। ऐसे में पचास साल बाद भी अस्पताल में वेंटिलेटर की व्यवस्था नही हो पायी। क्योंकि उसे संचालित करने के लिए स्टाफ ही नही है। बिना वेंटिलेटर के संचालित अस्पताल में कैसे डीएनबी के छात्र मरीजों का इलाज करेंगे।
निरीक्षण के दौरान उस मशीन को टेस्टिंग के लिए लगाया गया हुआ था। डॉ बी सी प्रसाद प्रमुख अधीक्षक मंडली जिला चिकित्सालय।

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