मंडलीय जिला अस्पताल में पांच माह से सिटी स्कैन मशीन खराब।

मेडिकल मुआवना के लिए घायल बनारस, मऊ और बलिया की लगा रहे दौड़।

आजमगढ़ आज की चाल, मंडलीय जिला अस्पताल में सीटी स्कैन पांच माह से खराब होने की वजह से जांच के लिए आने वाले मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वही इलाज के जरुरतमंद निजी जांच केंद्रों में पांच सौ से एक हजार रुपये खर्च जब खाली करनी पड़ रही है। जबकि वही प्रतिदिन मेडिकल मुआयना के लिए पहुंचने वाले घायलों को वाराणसी, बलिया और मऊ का चक्कर लगाना पड़ रहा है। मंडलीय जिला अस्पताल में प्रतिदिन सिटी स्कैन जांच के लिए मरीजों को धक्के खाने पड़ते है। आलम यह है कि वर्ष 2019 में पूणे की एक निजी कंपनी द्वारा सरकार के निर्देश पर जिला अस्पताल के मरीजों को बेहतर जांच सुविधा देने के लिए सीटी स्कैन मशीन लगवाई गई। उस दौर में जांच की प्रक्रिया बेहतर थी लेकिन जांच मशीन के लगते ही जिला अस्पताल की सिटी स्कैन मशीन खराब हो गई। मरीजों के जांच का बोझ अब निजी सिटी स्कैन पर बढ़ने लगा जिससे उनकी चांदी ही चांदी है और मरीजों की जेबें खाली होती हैं। आए दिन 100-150 मरीजों की सिटी स्कैन होने लगी। जांच का लोड बढने से मशीन धीरे-धीरे पांच माह से बैठ गई। अस्पताल में अब इलाज के लिए आने वाले कुछ मरीज तो अपने जेब का खर्च बढाते हुए इलाज करवा ले रहे है। जबकि गरीब तबके के मरीज निश्शुल्क जांच के अभाव में इलाज के बिना ही लौट रहे है। हद तो तब हो गई जब अस्पताल में पांच माह से सिटी स्कैन की जांच न होने से मेडिकल मुआयना करने वाले मरीजों को कभी वाराणसी कभी मऊ कभी बलिया की दौड़ लगानी पड़ रही है। हालात यह है कि वहां भी घायलों को सिटी स्कैन करवाने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है। इसके बाद उन्हें दो से तीन दिन तक रिपोर्ट लेने के लिए जाना पड़ता है। ऐसे में अस्पताल प्रशासन की इस व्यवस्था को कोसने से बाज नही आ रहे है।
जिला अस्पताल में अभी कम से कम एक माह बाद ही मरीजों को सिटी स्कैन जांच की सुविधा मिल पाएगी। शासन से जांच के लिए नई मशीन लगाने कार्य चल रहा है। बिजली का कनेक्शन हो चुका है।
डॉ दिनेश कुमार सिंहा, प्रमुख अधीक्षक मंडलीय जिला चिकित्सालय।

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