दीक्षोत्सव-2025 के अंतर्गत विज्ञान विभाग में बृहद परिचर्चा आयोजित,
खगोलीय घटनाओं से भारतीय संस्कृति और सभ्यता का सदियों पूर्व से ही जुड़ाव,
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय आजमगढ़ के परिसर में विज्ञान वर्ग के छात्रों के लिए आज बेहद कौतूहल का दिन था, क्योंकि न सिर्फ आजमगढ़ की धरती के लाल प्रोफेसर रामसागर, अपितु डॉ. अविजित गांगुली एवं कैंब्रिज विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ट्रेसी स्लैटायर अमेरिका, का व्याख्यान अपने विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित सेमिनार के माध्यम से सुनने का अवसर मिला। हालांकि अमेरिकी प्रोफेसर ऑनलाइन व्याख्यान दे रहे थे, परंतु उपस्थित छात्रों को उनका व्याख्यान खूब भाया। कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत विश्वविद्यालय के मुखिया प्रो. संजीव कुमार के उद्बोधन से शुरू हुआ फिर आजमगढ़ की धरती के लाल प्रो. रामसागर का व्याख्यान छात्र-छात्राओं को खूब लुभाया, छात्रों के लिए यह कौतूहल का विषय था कि अपनी धरती का लाल भी पठन-पाठन और ज्ञान विज्ञान को आत्मसात कर विश्व फलक पर देश का नाम रोशन कर रहा है।
विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. प्रवेश कुमार सिंह ने बताया कि आज विश्वविद्यालय परिसर में
अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन “कॉस्मिक मिस्ट्रीज़: प्रकाश और अंधकार” जो कि दीक्षोक्त्सव-2025 के अंतर्गत किया गया, का सफलतापूर्वक समापन हुआ। अतिव्यस्तता के बावजूद मेहमानों की मेहमानबाजी कुलपति जी ने समय निकालकर किया । अपने शुरुआती उद्बोधन उन्होंने तीनों मेहमानो एवं आगंतुकों के प्रति विशेष आभार ज्ञापित किया तथा मेहमानों से क्षमा मांगते हुए अन्य दायित्वो को पूर्ण करने में लग गए ।कुलपति प्रो. संजीव कुमार के उद्बोधन के उपरांत कार्यक्रम ने गति पकड़ ली। इस अवसर पर आजमगढ़ के रत्न प्रो. राम सागर, आईआईए बेंगलुरु, पूर्व निदेशक एरीज, ने उत्साहपूर्ण व्याख्यान प्रस्तुत किया। प्रो. सागर ने न केवल यह बताया कि एक भूमिगत दूरबीन (ग्राउंड बेस्ड टेलिस्कोप) स्थापित करने के लिए क्या मूलभूत आवश्यकताएँ होती हैं, बल्कि उन्होंने देवस्थल वेधशाला की स्थापना में सामने आई चुनौतियों को भी साझा किया। तदुपरांत प्रो. राम सागर ने विज्ञान संकाय के स्नातक वर्ग के पहले बैच के विद्यार्थियों से संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों के साथ एक-एक करके वार्ता का भरपूर आनंद लिया और उनके प्रश्नों का अत्यंत आत्मीयता से उत्तर दिया। ऐसा प्रतीत हो रहा था कि छात्र अपने घर में किसी गार्जियन के साथ शब्दों का आलोडन-विलोड कर रहे हैं।दूसरा व्याख्यान डॉ. अविजित गांगुली द्वारा दिया गया, जिसमें उन्होंने यह बताया कि भारतीय सभ्यता और संस्कृति प्राचीन काल से ही खगोलीय घटनाओं से गहराई से जुड़ी रही है। उन्होंने तारों के जन्म और मृत्यु की प्रक्रिया को विस्तार से समझाया। कार्यक्रम का अंतिम व्याख्यान प्रो. ट्रेसी स्लैटायर एम. आई. टी. कैम्ब्रिज USA से ऑनलाइन माध्यम द्वारा प्रस्तुत किया गया, जिसमें उन्होंने डार्क मैटर और उसके संभावित कणों पर चर्चा की। इस दौरान बी.एससी. के एक छात्र ने आकाशगंगाओं की परस्पर क्रिया में डार्क मैटर की भूमिका पर प्रश्न पूछा। प्रो. ट्रेसी ने छात्र के प्रश्न की सराहना की और संतोषजनक उत्तर प्रदान किया। छात्र सभी वैज्ञानिकों के भावनात्मक संबोधन से प्रभावित दिखे और भविष्य में इस तरह के कार्यक्रम आयोजित हो इस अपेक्षा के साथ सभी अपने गंतव्य की तरफ चले गए।सम्मेलन का समापन विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. अंजनी कुमार मिश्र के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने विद्यार्थियों और संकाय सदस्यों के उत्साह को देखकर गहरी प्रसन्नता व्यक्त की। साथ ही साथ आयोजन समिति तथा उससे जुड़े सभी वैज्ञानिकों के प्रति आभार ज्ञापित किया । इस सम्मेलन में प्रो ताहिर, संयोजक डॉ. अंकुर चौबे, डॉ. अमित, डॉ. अंकुर, डॉ. विभा, डॉ. सियाराम शुक्ल, श्री धीरज, श्री संजय, श्री नितेश, अमरजीत, श्रीकेश, रिद्धि श्रीवास्तव उपस्थित रहे।
