पूर्वांचल और दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण की तैयारियों पर प्रदेश के बिजली कर्मियों में गहरा आक्रोश है। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति ने आरोप लगाया कि पॉवर कारपोरेशन प्रबंधन घाटे के गलत आंकड़े प्रस्तुत कर निजीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाना चाहता है। समिति ने मुख्य सचिव एस.पी. गोयल से अपील की है कि निजीकरण हेतु तैयार किए गए आर.एफ.पी. डॉक्यूमेंट को मंजूरी न दी जाए।
समिति ने चेतावनी दी है कि यदि टेंडर प्रकाशित किया गया, तो प्रदेशभर के बिजली कर्मचारी, संविदा कर्मी, जूनियर इंजीनियर और अभियंता सामूहिक जेल भरो आंदोलन शुरू करेंगे, जिसके लिए पूरे तौर पर प्रबंधन जिम्मेदार होगा।
संघर्ष समिति का कहना है कि पावर कारपोरेशन के चेयरमैन डॉ. आशीष गोयल ने मुंबई में हुई एक मीटिंग के दौरान चुनाव बाद निजीकरण टेंडर जारी करने की बात कही थी। बिहार चुनाव समाप्त होते ही निगमों में यह प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
जारी आंकड़ों में समिति ने बताया कि पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम ने वर्ष 2024–25 में 19,624 करोड़ रुपये का राजस्व अर्जित किया है, जबकि सरकारी विभागों का 4,182 करोड़ का बकाया जोड़ने पर कुल राजस्व 23,806 करोड़ हो जाता है। कुल खर्च 20,564 करोड़ रहने के बाद निगम 3,242 करोड़ का मुनाफा दिखाता है।
वहीं दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम का कुल राजस्व 17,252 करोड़ रुपये और सरकारी बकाया मिलाकर 21,795 करोड़ हो जाता है। कुल खर्च 19,639 करोड़ रहने पर निगम को 2,156 करोड़ रुपये का लाभ प्राप्त होता है।
इसी मुद्दे को लेकर जारी आंदोलन के 355वें दिन आज बिजली कर्मियों ने आज़मगढ़ में बड़े पैमाने पर विरोध दर्ज कराया।
प्रभु नारायण पाण्डेय “प्रेमी”
संयोजक – विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, आजमगढ़
