संवाददाता धीरज वर्मा
आजमगढ़।
वेदांता हॉस्पिटल के निदेशक डॉ. शिशिर जायसवाल ने एक प्रेस वार्ता में कहा कि हमारा संस्थान चिकित्सा सेवा के क्षेत्र में मानव मूल्यों और वैज्ञानिक सोच को लेकर कार्यरत है। हमने सदैव मरीज की सेवा को प्राथमिकता दी है और आगे भी यही संकल्प रहेगा।
डॉ. जायसवाल ने हाल ही में चिरैयाकोट के एक मरीज की मृत्यु के बाद परिजनों द्वारा लगाए गए उत्पात और दुर्व्यवहार के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि पूरे घटनाक्रम का वीडियो साक्ष्य मौजूद है। उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल को बदनाम करने की एक साजिश के तहत यह माहौल तैयार किया गया। “एम्बुलेंस में मरीज जीवित था और तमाम रिकॉर्ड्स हमारे पास सुरक्षित हैं,” उन्होंने कहा।
प्रेस वार्ता में उन्होंने स्पष्ट किया कि अस्पताल में आपसी सहयोग और प्रशासन के भरोसे पर कार्य होता है। “हमारे यहां न तो बाउंसर हैं और न ही कोई हथियारबंद व्यवस्था। बावजूद इसके, हमारे स्टाफ विशेषकर महिला कर्मियों के साथ अभद्रता की गई। यह अत्यंत निंदनीय है,” उन्होंने कहा।
न्यूरो सर्जरी जैसे जटिल ऑपरेशनों की चर्चा करते हुए डॉ. जायसवाल ने बताया कि यहां छोटे से छोटा ऑपरेशन भी दो से ढाई घंटे का होता है, और हम हर केस को गंभीरता से लेते हैं। “हमारे पास झूठे आरोपों का जवाब देने का समय नहीं है, हम मरीजों की जान बचाने में विश्वास रखते हैं,” उन्होंने कहा।
एक उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि लोकगायिका उजाला यादव के एक परिचित का इलाज आयुष्मान योजना के तहत मुफ्त में किया गया था, लेकिन लोहिया अस्पताल में बाद की मृत्यु के लिए हमारे अस्पताल को दोषी ठहराना गलत है।
डॉ. जायसवाल ने कहा कि गनशॉट, प्वॉइजनिंग, हैंगिंग और मारपीट जैसे गंभीर मामलों में हमारा हॉस्पिटल लगातार सफलतापूर्वक सेवाएं दे रहा है, और प्रशासन का भी पूरा सहयोग मिलता है। “हमने तीन-तीन गोलियों से घायल मरीजों की जान बचाई है और इलाज के बाद ही शुल्क लिया है,” उन्होंने जोड़ा।
कोविड काल में किए गए सेवा कार्यों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि उस समय करीब 3,000 लोगों का इलाज किया गया। “हम मानते हैं कि संकट के समय सेवा करना ही असली मानव धर्म है,” डॉ. जायसवाल ने कहा।
अंत में उन्होंने कहा कि वे संस्था की विश्वसनीयता पर उठे किसी भी सवाल की कानूनी जांच के लिए तैयार हैं, लेकिन अफवाह फैलाकर किसी की छवि खराब करना समाज के लिए घातक है।
