देवेंद्र कुशवाहा मऊ

घोसी लोकसभा की विडंबना देखिए, जिस घोसी लोकसभा की पहचान स्वर्गीय कल्पनाथ राय के निधन के बाद से लगभग शून्य सी हो गई थी, जिस घोसी लोकसभा की आवाज राष्ट्रीय मंच तो छोड़िए लोकसभा क्षेत्र में भी कुंद सी पड़ गई थी, अब उसी घोसी लोकसभा की आवाज फिर से पुनर्जीवित हो उठी है। घोसी की आवाज विगत् एक वर्षों से उठी भी तो ऐसी उठी कि घोसी लोकसभा से लेकर राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय पटल पर भी अनवरत गूंज रही है और घोसी लोकसभा को यह सुखद अनुभूति प्रदान करने वाले एकमात्र नेता घोसी के सांसद ‘राजीव राय’ हैं।

आपको याद होगा अभी हाल ही में ब्रिटेन की संसद में घोसी सांसद को आमंत्रित किया गया था, जहां पर घोसी सांसद राजीव राय ने अपनी पार्टी के साथ-साथ राष्ट्रीय मुद्दों पर भी चर्चा किया था, जो अब तक घोसी लोकसभा में सुर्खियों का केंद्र बिंदु बना हुआ है।

अब जब पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद से पूरा देश एकजुट होकर आतंकवाद के खिलाफ लड़ रहा है, तथा देश की सेना ने पाकिस्तान की नापाक मंसूबों पर पानी फेरते ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को अंजाम देकर न सिर्फ पहलगाम में हताहत हुए निहत्थे लोगों की मौत का बदला लिया, बल्कि पाकिस्तान में फल-फूल रहे तमाम आतंकी संगठनों को नेस्तनाबूत भी किया।

 

अब पाकिस्तान द्वारा आतंकवाद को संरक्षण देने तथा पाकिस्तान द्वारा भारत में आतंकवाद की तमाम घटनाओं को अंजाम देने के मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उठाने के लिए तथा आतंकवाद के गढ़ पाकिस्तान की असलियत दुनिया के सामने लाने के लिए विदेश में भेजने हेतु भारत सरकार ने 7 प्रतिनिधिमंडल समूहों का चयन किया है। जिसमें सत्ता दल के साथ-साथ विपक्ष के नेताओं को भी रखा गया है।

 

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि घोसी लोकसभा से पहली बार चुनाव जीते सांसद राजीव राय को भी प्रतिनिधिमंडल में रखा गया है। गौर करने की बात यह है कि राजीव राय को जिन देशों का दौरा करना है, उनमें ग्रीस, लाटिवा, स्लोवेनिया, स्पेन और रूस देश शामिल हैं। यह पहली बार हुआ है जब भारत ने किसी देश से युद्ध किया हो या युद्ध की स्थिति बनी हो, लेकिन भारत का सबसे विश्वस्त्र सहयोगी देश रूस भी खामोश रहा है, अन्यथा रूस ने भारत के हर युद्ध में हमेशा भारत का पुरजोर सहयोग व समर्थन किया है।

 

ऐसे में अन्य देशों के साथ-साथ रूस में भी घोसी के सांसद राजीव राय को भेजा जाना राजीव राय की विद्वता, बौद्धिकता, तथा राष्ट्रीय मुद्दों पर उनकी शानदार पकड़ का ही नतीजा है।

 

पार्टी के साथ-साथ भारत सरकार ने भी राजीव राय की योग्यता को परखा है, जिसके चलते अंतरराष्ट्रीय मंच पर घोसी सांसद राजीव राय को प्रतिनिधित्व करने का अवसर दिया है।

 

आपको बताते चलें की एक समय घोसी की आवाज स्वर्गीय कल्पना राय के रूप में राष्ट्रीय पटल पर गूंजा करती थी, किंतु उनके निधन के बाद से वह आवाज गुम सी हो गई थी, ऐसे में वर्ष 2024 की लोकसभा चुनाव में राजीव राय के प्रचंड जीत के बाद से घोसी की आवाज राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर सतत् बलवती हुई। आज राजीव राय के माध्यम से घोसी लोकसभा की आवाज विभिन्न मंचों पर गूंज रही है।

आगे आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा की बलिया के सुरही से निकलकर बैंगलोर में शिक्षाविद् के रूप में परचम लहराने वाले, तथा वर्ष 2014 की लोकसभा चुनाव में हारने के बावजूद घोसी लोकसभा में लगातार खूंटा गाड़कर 10 वर्षों तक अनवरत् जनसेवा करके वर्ष 2024 की लोकसभा चुनाव में पूर्वांचल की सबसे बड़ी प्रचंड जीत दर्ज करने वाले राजीव राय का यह कारवां आगे कहां तक जाता है।

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