आजमगढ़। विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, उत्तर प्रदेश ने प्रदेश के मुख्य सचिव शशि प्रकाश गोयल को पत्र भेजकर पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगमों के निजीकरण की प्रक्रिया को तत्काल निरस्त करने की मांग की है। समिति ने निजीकरण को “लूट का दस्तावेज़” करार देते हुए कहा कि यह निर्णय पूरी तरह भ्रामक और अपारदर्शी प्रक्रिया पर आधारित है।सभा का संचालन कर रहे संयोजक प्रभु नारायण पांडेय ‘प्रेमी’ ने बताया कि संघर्ष समिति के आह्वान पर 04 अगस्त को आंदोलन के 250 दिन पूरे होने पर मुख्य अभियंता कार्यालय, आज़मगढ़ पर दोपहर 2 बजे से 5 बजे तक विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।समिति ने आरोप लगाया कि घाटे के गलत आंकड़ों के आधार पर निजीकरण का प्रस्ताव तैयार किया गया। पावर कारपोरेशन की बैलेंस शीट में सब्सिडी और सरकारी बकायों को जोड़कर घाटा बढ़ा-चढ़ाकर दिखाया गया है, जबकि वास्तविकता में कई निगम लाभ में हैं या बेहद मामूली घाटे में।इसके अलावा समिति ने ट्रांजैक्शन कंसल्टेंट मेसर्स ग्रांट थॉर्टन की नियुक्ति को भी घोटाले से जोड़ते हुए बताया कि यह कंपनी अमेरिका में दंडित और प्रतिबंधित है। बावजूद इसके, उसे झूठे शपथपत्र के बाद भी नियुक्त कर लिया गया और निजीकरण दस्तावेज उसी से बनवाए गए। समिति ने यह भी खुलासा किया कि वित्त निदेशक निधि नारंग और ग्रांट थॉर्टन के बीच निकटता के चलते कई गोपनीय फाइलें भी साझा की गईं।निजीकरण के लिए बनाए गए आरएफपी डॉक्यूमेंट में एक लाख करोड़ से अधिक की परिसंपत्तियों का रिजर्व प्राइस मात्र 6500 करोड़ रुपये रखा गया है और भूमि को केवल 1 रुपये की लीज पर देने की बात कही गई है। यह सीधे-सीधे राज्य के संसाधनों की लूट है।संघर्ष समिति ने मुख्य सचिव से मांग की है कि वे मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की भ्रष्टाचार विरोधी छवि के अनुरूप इस पूरे मामले में हस्तक्षेप कर निजीकरण की प्रक्रिया पर रोक लगाएं।प्रभु नारायण पांडेय ‘प्रेमी’संयोजक, विद्युत कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति, आज़मगढ़

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