आजमगढ़ जिले के फूलपुर कोतवाली क्षेत्र की स्थिति यह सवाल उठाती है कि – क्या जज़्बा ही सब कुछ है या व्यवस्था की कमी पर भी ध्यान देना ज़रूरी है।
करीब 90 से अधिक पुलिसकर्मियों की टीम, जिनमें कोतवाली प्रभारी व.उपनिरीक्षक म. उपनिरीक्षक 2 चौकी प्रभारी समेत 14 दारोगा लगभग 80 सिपाही शामिल हैं, पूरे क्षेत्र की कानून व्यवस्था संभाल रहे हैं। थाने के अधीन दो पुलिस चौकियाँ और कई पुलिस बूथ हैं, लेकिन हैरानी की बात यह है कि पूरी कोतवाली के पास सिर्फ एक पुरानी जीप है, पुलिसकर्मी अपराधियों का पीछा करते हैं और गिरफ्तारी तक पहुँचते हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है कि सीमित संसाधनों के बावजूद पुलिस की सक्रियता सराहनीय है — लेकिन सवाल यह भी उठता है कि इतने बड़े क्षेत्र की सुरक्षा व्यवस्था को सिर्फ एक पुरानी गाड़ी पर कैसे टिकाया जा सकता है?
यदि किसी बड़ी वारदात या पीछा करने की स्थिति में वही जीप खराब हो जाए तो क्या होगा?
जानकारों के अनुसार, फूलपुर कोतवाली की टीम ने कई बार इसी पुरानी जीप से अपराधियों को दबोचा है, जो उनकी कर्मनिष्ठा और साहस को दर्शाता है। फिर भी यह स्पष्ट है कि पुलिसकर्मियों के इस समर्पण को सरकार और उच्च अधिकारियों से बेहतर संसाधनों का साथ मिलना चाहिए।
स्थानीय नागरिकों का कहना है —
“हमारी कोतवाली पुलिस मेहनती है, लेकिन अगर उन्हें नई गाड़ियाँ और आधुनिक उपकरण दिए जाएँ तो वे अपराधियों पर और तेजी से शिकंजा कस सकते हैं।
”फूलपुर की यह तस्वीर पुलिस बल के जज़्बे और व्यवस्था की खामियों — दोनों की कहानी कहती है।अब देखना यह है कि उच्च अधिकारी और सरकार कब इस जज़्बे को आधुनिक संसाधनों से ताकत देते हैं।
