आर्दश रामलीला समिति रामलीला का मंचन भगवान श्रीराम वनवास से लौटने के बाद राज्याभिषेक एक भव्य समारोह मुख्य अतिथि प्रधानाध्यापक योगेश मणि त्रिपाठी ।

 

संवाददाता आलापुर अम्बेडकर नगर।

 

अम्बेडकर नगर जिले के विकास जहागीरगंज अन्तर्गत ग्राम पंचायत आदर्श राम लीला समिति इन्दौरपुर उर्फ घिनहापुर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी गांव के ही कलाकारों के द्वारा रामलीला का किया गया मंचन ।रामलीला कार्यक्रम के मुख्य अतिथि रहे योगेश मणि त्रिपाठी प्रधानाचार्य अध्यापक मुख्यअतिथि का रामलीला के कलाकारों के द्वारा माला पहनाकर किया स्वागत ।मुख्य अतिथि योगेश मणि त्रिपाठी प्रधानाचार्य अध्यापक ने कहा कि श्री राम के आदर्श पालन करने से ही क्रान्ति होती है जिससे समाज का भला होती ,श्री राम के आदर्श से ही विचार पर चलना चाहिए।भरत मिलाप के साथ हुआ रामलीला का हुआ समापन।आदर्श रामलीला समिति की रामलीला में भरत मिलाप का मंचन करते कलाकार। रामलीला का समापन भरत मिलाप के ऐतिहासिक और भावनात्मक मंचन के साथ हुआ।श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी, जिसने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।गगनभेदी जयघोषों के बीच जब मंच परभगवान श्रीराम और भरत का मिलन हुआ, तो वातावरण भक्तिमय हो उठा। हर आंख नम थी और हर जुबान पर जय श्रीराम का उद्घोष। वर्षों पुरानी इस परंपरा को देखने के लिए आसपास के गांवों से भी हजारों की संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। श्री मणि त्रिपाठी मास्टर ने बताया कि यह भरत मिलाप मंचन वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से श्रद्धालु पहुंचते हैं।वनवास से लौटने के बाद भगवान राम का राज्याभिषेक एक भव्य और आनंदमय समारोह था जिसका वर्णन रामायण और रामचरितमानस में मिलता है। यह न केवल राम के राजा बनने की घटना थी, बल्कि एक आदर्श शासन की स्थापना का भी प्रतीक था जिसे ‘रामराज्य’ कहा जाता है।​राज्याभिषेक की प्रक्रिया कुछ इस प्रकार थी ​भरत से भेंट और स्वागत: लंका से पुष्पक विमान में अयोध्या लौटते समय भरत को यह सूचना मिली कि राम वापस आ रहे हैं।जैसे ही राम अयोध्या के निकट पहुंचे, भरत उनसे मिलने गए और उनका भव्य स्वागत किया। भरत ने राम को अपना राज्य वापस लौटा दिया।​अयोध्या की सजावट राम के आगमन की सूचना से पूरी अयोध्या में खुशी की लहर दौड़ गई। हर घर में दीपक जलाए गए, सड़कों पर सुगंधित फूलों से सजावट की गई और पूरे नगर में उत्सव का माहौल था।​राज्याभिषेक समारोह ​सबसे पहले, राम और सीता को राजसी वस्त्र पहनाए गए।​गुरु वशिष्ठ ने एक भव्य सिंहासन मंगवाया, जो सोने और रत्नों से जड़ा हुआ था।​इस समारोह के बाद राम ने अयोध्या का शासन संभाला।इस मौके पर आशुतोष तिवारी ग्राम प्रधान महेंद्र यादव गुलाब यादव राम रसिक यादव सुनील यादव सुरेंद्र यादव दीनदयाल यादव आदि लोग मौजूद रहे। में

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