केयरटेकर गीता देवी ड्यूटी से लापता, ग्राम प्रधान और सचिव की मिलीभगत से महीनों से बंद पड़ा ताला।

केयरटेकर महीनों से गायब, जिम्मेदारों की लापरवाही उजागर।

लाखों की लागत से बना शौचालय बना शोपीस, दलित बस्ती के लोग खुले में शौच को मजबूर।

संवाददाता श्यामलाल मौर्या आलापुर अम्बेडकरनगर।

अम्बेडकर नगर जिले/आजमगढ़ जिले में

स्वच्छता को लेकर बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकारी व्यवस्था की जमीनी सच्चाई आजमगढ़ जिले के विकास खंड महाराजगंज अंतर्गत ग्राम पंचायत देवारा हरखपुरा में साफ नजर आ रही है। यहां अनुसूचित जाति बस्ती में लाखों रुपये की लागत से बना सामुदायिक शौचालय बीते पांच महीनों से ताले में कैद है। हालत यह है कि जिस सुविधा के लिए यह निर्माण कराया गया था, वही आज ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गया है।ग्रामीणों के मुताबिक, शौचालय पर नियुक्त केयरटेकर गीता देवी महीनों से ड्यूटी पर नहीं आ रही हैं। शौचालय का ताला तक नहीं खुलता, जिससे लोगों को मजबूरी में खुले में शौच के लिए जाना पड़ रहा है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन जिम्मेदारों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि इस संबंध में कई बार ग्राम प्रधान और ग्राम सचिव से शिकायत की गई, लेकिन हर बार केवल आश्वासन ही मिला। न तो केयरटेकर के खिलाफ कोई कार्रवाई हुई और न ही शौचालय को चालू कराने के लिए कोई ठोस कदम उठाया गया। इससे साफ जाहिर होता है कि जिम्मेदारों की लापरवाही के चलते सरकारी योजनाएं कागजों तक ही सीमित रह गई हैं।ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी धन का दुरुपयोग कर केवल दिखावे के लिए निर्माण कार्य कराए जाते हैं, लेकिन उनकी देखरेख और संचालन की कोई व्यवस्था नहीं की जाती। यही वजह है कि सामुदायिक शौचालय जैसे महत्वपूर्ण संसाधन भी बेकार पड़े हैं। ग्रामीणों ने कहा कि केयरटेकर गीता देवी ड्यूटी से गायब, पांच महीने से शौचालय पर ताला ग्राम प्रधान व सचिव की मिलीभगत से व्यवस्था ध्वस्त, ताले में कैद सामुदायिक शौचालय केयरटेकर गीता देवी नदारद, ग्राम प्रधान सचिव की मिलीभगत से दलित बस्ती बेहाल,लाखों का शौचालय बना मजाक केयरटेकर गीता देवी ड्यूटी से लापता, ग्राम प्रधान और सचिव की मिलीभगत से महीनों से बंद पड़ा ताला।इस मामले को लेकर गांव में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही शौचालय को चालू नहीं कराया गया और लापरवाह कर्मचारियों व जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई, तो वे जिलाधिकारी सहित उच्चाधिकारियों से शिकायत कर आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

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