लखनऊ: उत्तराखंड के हल्द्वानी में पिछले दिनों हुए बवाल पर राष्ट्रीय उलेमा कौंसिल के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना आमिर रशादी ने कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि, उत्तराखंड में लगातार मुसलमनों और उनके धार्मिक स्थलों को निशाना बनाया जा रहा है, 8 फरवरी को हल्द्वानी प्रशासन द्वारा सुनियोजित तरीके से मस्जिद और मदरसे को अवैध ज़मीन पर बताकर तोड़ दिया गया। जब वहां के स्थानीय लोगों ने इसका विरोध किया तो उनपर पुलिस के द्वारा गोलियां बरसाई गईं जिससे कई बेगुनाहों की जान चली गई। जान और माल के नुकसान के बाद अब वहां गंभीर धाराओं में मुकदमा कर सैकड़ों बेगुनाहों को फंसाया जा रहा है और गिरफ्तारियां की जा रही हैं जो कि निंदनीय है। हम मांग करते हैं कि इस पूरी घटना की स्वतंत्र न्यायिक जांच कराई जाए ताकि असल सच सामने आ सके।
श्री रशादी ने हल्द्वानी नगर निगम व पुलिस प्रशासन की इस पूरी कार्यवाही को गलत ठहराया और सवाल किया कि जब मामला मा0 उच्च न्यायालय में विचाराधीन है और उसकी सुनवाई के लिए 14 फरवरी नियत थी तो पुलिस ने किसके दबाव में इतना बड़ा क़दम उठाया जिससे दर्जनों बेगुनाह नागरिकों की मौत हुई और सैकड़ों लोग घायल हुए।
मौलाना आमिर रशादी ने पूछा कि क्या अब मुसलमान होना गुनाह है? क्या मुसलमान भारत के नागरिक नहीं? आखिर एक समुदाय के प्रति इतनी नफरत क्यों ? हल्द्वानी में जो कुछ हुआ उसकी जिम्मेदार सीधे तौर पर उत्तराखंड सरकार और स्थानीय प्रशसन है। इससे पहले भी उत्तराखंड में कई मस्जिद और मज़ार तोड़ने की खबरें लगातार आती रही हैं। उन्होंने आगे कहा कि आज ऐसा माहौल बना दिया गया है कि सिर्फ उत्तराखंड नहीं बल्की देश के कई इलाको में मुसलमानों को टारगेट किया जा रहा है जो इस देश की एकता, सद्भाव और विकास के लिए ठीक नहीं। देश के हर वर्ग को देश हित मे साथ आकर इस नफरत की राजनीति को समाप्त करना होगा।
