संवाददाता देवेंद्र कुशवाहा 

कड़ी सुरक्षा में निकला आशुरा का जुलूस, लोगों ने मातम और गिरया कर अपने मज़लूम इमाम को खिराज-ए अक़ीदत पेश किया

मोहर्रम की दस तारीख पर बुधवार को कोपागंज में कड़ी सुरक्षा के बीच अलम और ताज़िये का जुलूस निकला । इस दौरान पूरा इलाका या अली या हुसैन की सदा से गूंज उठा । इस जुलूस का आगाज़ चौक न० 1 फुलेल पूरा पर मौलाना हसन रज़ा सहाब की दिल सोज़ तक़रीर से हुआ उन्होंने इमाम हुसैन अ0स0 की मज़लूमी बयान करते हुए कहा कि इमाम हुसैन अoस० ने आखिर वक्त में तुम्हे याद किया कि ऐ मेरे शियों काश कि तुम कर्बला में होते तो देखते कि मैं किस तरीके से यज़ीदी लश्कर से अपने 6 माह के बालक के लिए पानी मांग रहा था जिसे सुन कर लोगों में कोहराम बरपा हो गया हर व्यक्ति दहाड़े मार कर रो रहा था । इमाम हुसैन को क़त्ल करने वाला यजीद अय्याश, शराबी और बहुत बड़ा जुआरी था जिसने इस्लाम धर्म को पामाल कर दिया था, यज़ीद पहला आतंकवादी था जिसे आतंकवाद का जनक कहा जाता है मगर अफ़सोस है आज के मुसलमानों पर जो यज़ीद की पैरवी करते हैं जिसका परिणाम आपके सामने है कि पूरी दुनिया में इस्लाम को आतंकवाद से जोड़ कर देखा जाता है । उसके बाद ताजिया न० (1)एक की अंजुमन हाय मातमी ने नौहा मातम कर अपने ज़माने के इमाम की ख़िदमत में आंसुओं का नज़राना पेश किया ।
कर्बला का ज़र्रा ज़र्रा रो रहा है ।
ऐ रात न ढल जाना ऐ रात न ढल जाना ।
यह जुलूस अपने परम्परागत रास्तों से चमन रोड होता हुआ ताजिया न० 2 व 3 के जुलूस से मिलता हुआ मच्छर घट्टे पहुचता है जहा ताजिया न० 4,5, का जुलूस बाज़िद्पुरा इमाम चौक से आकर मिलता है यहाँ पर शहर की सभी अंजुमनों ने अपने मखसूस अंदाज़ मे नौहा व मातम किया उसके बाद यह जुलूस हनुमान चौक होता हुआ मौलाना हसन रज़ा इमाम जुमा , अशफाक हसनैन, कर्रार अली, असद रज़ा एवं आदि ताजियादारों की निगरानी में अपने क़दीमी रास्तों से काछी कला कर्बला में देर शाम प्रशासन की कड़ी सुरक्षा में दफ्न हुआ । कोपागंज चौक पर मौलाना शमशीर अली मुख्तारी साहब ने तक़रीर की उन्होंने कर्बला की तारीख पर रोशनी डालते हुए कहा कि दुनिया में इमाम हुसैन का वाहिद ऐसा नाम है जिसे मानने के लिए किसी मज़हब की कैद नही है इमाम हुसैन किसी मज़हब के नही बल्कि इंसानियत के रहनुमा हैं ।
इमाम हुसैन को क़त्ल करने वाले कोई हिन्दू, इसाई या यहूदी नही थे बल्कि हुसैन को मुसलमानों ने क़त्ल किया जिसको एक कवि ने खूब कहा है कि
क्या तमाशा हुआ इस्लाम की तकदीर के साथ
क़त्ल शब्बीर हुआ नारा-ए तकबीर के साथ
आगे बताया कि पूरी दुनिया को कर्बला का गहन अध्ययन करना चाहिए जिस तरीके से राष्ट्र पिता महात्मा गाँधी जी ने किया था । गंधी जी ने जब अपने 72 साथियों के साथ नमक आन्दोलन चलाया तो उनसे सवाल हुआ कि यह 72 का क्या फलसफा है तो उन्होंने कहा कि “ मैंने कर्बला की दर्दनाक घटना का अध्ययन किया है और इससे यह विश्वास हो गया कि अगर भारत को आज़ादी मिल सकती है तो हमें हुसैनी सिद्धांतों पर चलना होगा, गाँधी जी ने कहा कि इमाम हुसैन उस महान पुरुष का नाम है जिसने इंसानियत के लिए ज़ालिम यज़ीद के आगे सर कटा दिया मगर झुकाया नही. इमाम हुसैन ने इस्लाम और मानवता की रक्षा के लिए कर्बला में अपने साथ बहत्तर साथियों की कुर्बानी दी जो मेरे लिए आदर्श बनी”।
इस मौके पर मौलाना हसन रज़ा,हसनैन अली, अम्बर हुसैन, इरशाद हुसैन,मौलाना शमशीर अली, डा.मौलाना मुन्तज़िर मेहंदी,जर्रार अली,कर्रार अली , बाक़र रज़ा शिबू, आबिद अली , जमील असग़र गुड्डू, कायम मेंहदी, अली ज़फर,के अलावा अत्यधिक तादाद में छोटे छोटे बच्चे भी थे जो इमाम हुसैन के बच्चों का मातम करने के लिए आये थे ।

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