आजमगढ़ जिले के चौक स्थित महाकाली के दक्षिण मुखी मंदिर में प्रतिवर्ष वार्षिक श्रृंगार का कार्यक्रम किया जाता है। नव वर्ष की पूर्व संध्या से मंदिर में भक्तों की उमड़ने वाली भीड़ वार्षिक श्रृंगार तक जारी रहती है। प्रतिवर्ष चार और पांच जनवरी को मां काली का वार्षिक श्रृंगार किया जाता है। इस वार्षिक श्रृंगार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दूर-दूर से भक्त आते हैं और मां का दर्शन का आशीर्वाद लेते हैं।
आजमगढ़ जिले के चौक स्थित महाकाली के दक्षिण मुखी मंदिर में प्रतिवर्ष वार्षिक श्रृंगार का कार्यक्रम किया जाता है। नव वर्ष की पूर्व संध्या से मंदिर में भक्तों की उमड़ने वाली भीड़ वार्षिक श्रृंगार तक जारी रहती है। प्रतिवर्ष चार और पांच जनवरी को मां काली का वार्षिक श्रृंगार किया जाता है। इस वार्षिक श्रृंगार कार्यक्रम में बड़ी संख्या में दूर-दूर से भक्त आते हैं और मां का दर्शन का आशीर्वाद लेते हैं।
नववर्ष से ही यह तैयारी शुरू हो जाती हैं। मंदिर में वार्षिक श्रृंगार को देखते हुए मंदिर के आसपास बड़ी संख्या में दुकान लग जाती हैं। जहां से भक्ति मां के प्रसाद लेकर मां के चरणों में अर्पण कर अपने मन की मुराद मांगते हैं। और मां काली अपने भक्तों की हर मुराद पूरी करती हैं यही कारण है कि दक्षिण मुखी मां काली मंदिर में भक्तों का भारी मेला
मंदिर के पुजारी शरद त्रिपाठी ने बताया कि कोलकाता में दक्षिणेश्वर मंदिर के बाद आजमगढ़ में ही दक्षिण मुखी मंदिर है। यह मंदिर तांत्रिक मंदिर माना जाता है। यही कारण है कि यहां भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती हैं।
चैत्र और शादी नवरात्र के अतिरिक्त नव वर्ष के साथ-साथ पड़ने वाले त्योहार विजयदशमी के दिन भी दक्षिण मुखी माता के मंदिर में भक्तों का भारी मेला उमड़ता है। मंदिर की महत्ता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आए दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर के बाहर भंडारे का भी आयोजन करते हैं। जिसमें बड़ी संख्या में भक्ति सहभागिता करते हैं।
