चक्रवर्ती सम्राट महापदम नन्द। केंद्रीय शासन प्रणाली के जनक थे

संवाददाता हामिद अली
गोंडा,2अप्रैल। राष्ट्र की आन-बान-शान थे सम्राट महापदम नन्द। अखण्ड राष्ट्र के निर्माता थे चक्रवर्ती सम्राट महापदम नन्द। केंद्रीय शासन प्रणाली के जनक थे महापदम नन्द। समता मूलक राष्ट्र के संस्थापक थे महापदम नन्द। नन्द की सैन्य शक्ति से भयभीत होकर सिकन्दर बिना युद्ध किये ही घुटने टेक दिया।कर्टियस के अनुसार महापदम नन्द के पास 3 हजार हाथी,20हजार घुड़सवार,2हजार रथ,2 लाख पैदल सैनिक थे। कुछ इतिहासकार लिखते हैं कि 80हजार अश्वारोही,8हजार रथ,6हजार हाथी के साथ उसकी सेना बहुत शक्तिशाली थी।राष्ट्र को सोने की चिड़िया बनाने वाले थे महापदम नन्द। नन्द साम्राज्य धनधान्य से परिपूर्ण था। उनके राजकोष में 99करोड़ स्वर्ण मुद्रा थी। हरित क्रांति का युग था।उस समय कृषि और व्यापार में बहुत उन्नति हुयी।हरतरफ खुशहाली का वातावरण था।वनों में शिकार प्रतिबंधित था।पहले जैन और बाद में बुद्ध धम्म को जन-जन में प्रवाहित किया और बुद्ध धम्म को राजधर्म बनाया।एक विशाल साम्राज्य के संस्थापक थे सम्राट महापदम नन्द। सर्वप्रथम अनेक सड़कों,नहरों,तालाबों,कुओं,छायादार व फलदार वृक्षों,अस्पतालों को जनहित में बनवाने का कार्य किया। 16महाजनपदों को जीतकर मगध को शक्तिशाली साम्राज्य बनाया।

उक्त विचार चक्रवर्ती बौद्ध सम्राट महापदम नन्द के 2415वें जन्मोत्सव पर संत रविदास बुद्ध विहार बड़गांव में मास के राष्ट्रीय संगठक ए.के.नन्द ने व्यक्त किया। किशोरी लाल ने कहा कि ऐसे महानायक लाखों में पैदा होते हैं।हमें ऐसे महापुरूष से प्रेरणा लेनी चाहिए। एमएल गौतम ने कहा कि उनकी समता मूलक समाज की सोच ने ही राष्ट्र को समृद्धिशाली बनाने का कार्य किया।आरपी बौद्ध ने कहा कि सम्राट महापदम नन्द के शासन में शिक्षा के सशक्तिकरण और सम्पत्ति की दिन दूनी रात चौगुनी बृद्धि होती थी। आरके राव ने कहा कि नंद साम्राज्य में हर तरफ विकास ही विकास दिखाई देता था।शिक्षा,चिकित्सा,रक्षा-सुरक्षा के क्षेत्र में अमन-चैन दिखाई देता था।16महाजनपदों का विजेता ही चक्रवर्ती बौद्ध सम्राट महापदम नन्द कहलाया।छोटे लाल ने गीतों के माध्यम से महापदम नन्द के शासन काल की प्रशंसा किया।शिवचरन गौतम ने कहा कि सम्राट महापदम नन्द इतिहास में एक ऐसे महापुरूष हुए जिन्होंने आम जनता के सुख-दुख को अपना सुख-दुख समझा।कार्यक्रम हरिप्रसाद बौद्ध,काशीराम,मनमोहन,शेषराम वर्मा,मेलाराम ठाकुर,किशन कुमार,सुखराम प्रसाद,राजेश पासवान,गुरचरन लांगुरी,अनीता बौद्ध,मनीता बौद्ध,मीना बौद्ध,उर्मिला बौद्ध,किरन राव,राम पाल भाष्कर,अजय सरोज,राधेश्याम भाष्कर,प्रभाकर राव त्यागी,सूरज लाल,धीरज भारती,अमरनाथ,अनुपम कुमार,संतोष और अनेक उपासिका व उपासकगण ने सहभाग किया।

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