नौ बार विधायक रहे दुर्गा प्रसाद यादव के बाद संभावित उत्तराधिकारी को लेकर अटकलें, विभिन्न सामाजिक वर्गों से भी दावेदार सक्रिय!
लेख | जर्नलिस्ट- मनीष कुमार
आजमगढ़ सदर विधानसभा सीट का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। आजादी के बाद से इस सीट ने अलग-अलग राजनीतिक दलों और नेताओं को विधानसभा तक पहुंचाया है। समय के साथ यहां के राजनीतिक समीकरण बदले, लेकिन पिछले कई दशकों में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री दुर्गा प्रसाद यादव का प्रभाव इस सीट की राजनीति में प्रमुख रहा है। अब 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर एक बार फिर यह सवाल चर्चा में है कि दुर्गा प्रसाद यादव के बाद समाजवादी पार्टी सदर सीट पर किस चेहरे को मैदान में उतारेगी।
दुर्गा प्रसाद यादव ने 1985 में निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक पारी की शुरुआत की थी। इसके बाद उन्होंने जनता दल और समाजवादी पार्टी के टिकट पर भी चुनाव जीते। 1993 में उन्हें बसपा के राजबली यादव से हार का सामना करना पड़ा, लेकिन इसके बाद उन्होंने 1996 से लगातार सदर सीट पर जीत दर्ज की। 2022 के विधानसभा चुनाव में भी उन्होंने भाजपा प्रत्याशी को हराकर जीत हासिल की और सदर विधानसभा क्षेत्र से नौवीं बार विधायक बने।
लंबे समय तक एक ही नेता के प्रभाव में रहने वाली इस सीट पर अब 2027 को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं। दुर्गा प्रसाद यादव के बेटे विजय यादव का नाम संभावित दावेदार के तौर पर चर्चा में है। विजय यादव स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और जिला पंचायत अध्यक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल रहें हैं। समर्थकों का मानना है कि परिवार का पुराना राजनीतिक संपर्क और क्षेत्र में सक्रियता उनके लिए महत्वपूर्ण आधार हो सकती है।
हालांकि, सदर सीट पर चर्चा केवल यादव परिवार तक सीमित नहीं है। मुस्लिम, दलित और राजभर, मौर्य, कुशवाहा सहित विभिन्न पिछड़े वर्गों से जुड़े नेताओं की ओर से भी राजनीतिक सक्रियता दिखाई दे रही है। ऐसे संभावित दावेदार पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी मजबूत दावेदारी पेश करने की कोशिश कर रहे हैं।
मुस्लिम और अन्य सामाजिक वर्गों के कुछ नेताओं के बीच यह चर्चा भी है कि लंबे समय से पार्टी के साथ रहने वाले विभिन्न समुदायों को विधानसभा स्तर पर प्रतिनिधित्व का अवसर मिलना चाहिए। दूसरी ओर टिकट चयन में संगठन के प्रति सक्रियता, क्षेत्र में जनसंपर्क, राजनीतिक स्वीकार्यता और चुनावी परिस्थितियों जैसे पहलुओं को भी महत्वपूर्ण माना जा सकता है।
यही वजह है कि 2027 के लिए प्रत्याशी चयन को लेकर सदर सीट पर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ती दिखाई दे रही हैं। हालांकि समाजवादी पार्टी की ओर से अभी किसी प्रत्याशी के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए मौजूदा समय में सामने आ रहे सभी नामों को संभावित दावेदारी के रूप में ही देखा जाना चाहिए।
आजमगढ़ सदर का इतिहास यह बताता है कि यहां समय-समय पर राजनीतिक समीकरण बदलते रहे हैं। अब 2027 में समाजवादी पार्टी का फैसला इस बात को लेकर चर्चा में रहेगा कि पार्टी अपने लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक प्रभाव को आगे बढ़ाने वाले चेहरे पर भरोसा करती है या सामाजिक प्रतिनिधित्व के नए समीकरण के साथ किसी नए उम्मीदवार को अवसर देती है।
अंततः प्रत्याशी का फैसला पार्टी नेतृत्व करेगा। टिकट की आधिकारिक घोषणा के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि आजमगढ़ सदर में समाजवादी पार्टी की अगली राजनीतिक दिशा क्या होगी। फिलहाल विरासत, नए नेतृत्व और विभिन्न सामाजिक वर्गों की दावेदारी के बीच सदर विधानसभा सीट 2027 के चुनाव से पहले चर्चा का प्रमुख केंद्र बनी हुई है।
