मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना, जिला अस्पताल लावारिसों मरीजों के प्रति लावारिसों जैसा अपने जिम्मेदारियां का निर्वाह करते हुए।
आजमगढ़, मंडलीय जिला चिकित्सालय में मानवता को शर्मसार करने वाली घटनाओं को आये दिन अंजाम देते रहता है। भारतीय सभ्यता में कुत्ते को भी फेंक कर भोजन नहीं कराया जाता है। पर इस सभ्यता को दरकिनार लावारिस वार्ड में भर्ती अज्ञात मरीज जो घायल और बेसुध है जिसके हाथ पैर और सर में पत्तियाँ बधी हैं। उस मरीज का भोजन बेड से कुछ दूर फर्श पर रखकर खाने के लिए रख दिया जाता है। स्वास्थ्य अधिकारी, स्वास्थ्य कर्मी और डॉक्टर लावारिस वार्ड में अज्ञात भर्ती मरीजों के जीवन और इलाज के लिए प्रति कितने सजग रहते हैं। यह स्पष्ट रूप से दिखता है की प्यास लगने पर शौचालय के अंदर का पानी पीकर मरीज अपनी प्यास बुझाता है।पूर्व कई मरीज ने इलाज और भूख प्यास के कारण दम तोड़ दिया। वहीं भर्ती अज्ञात मरीज के जख्मों को चूटे और चुटिया काट कर खा रहे थे, वहीं भर्ती अज्ञात मरीज जों फर्श पर गिरकर कब दम तोड़ दिया और उसके शव को कई जगहो से चूहे, चूटे और चीटियां खा गई थी स्वास्थ्य कर्मियों को पता ही नहीं चल सका जब पत्रकार द्वारा देखा गया और स्वास्थ्य विभाग के उच्चधिकारीयों को इस घटना से अवगत कराया गया तब जाकर आनन-फानन में अज्ञात व्यक्ति के शव को मोर्चरी में रखा गया। हद तो तब हो गई जब बुधवार को लावारिस वार्ड में भर्ती अज्ञात घायल मरीज जिसे एंबुलेंस द्वारा लाया गया था। वह लावारिस वार्ड में बेड पर बेसुध पड़ा हुआ है। जिसके सर, हाथ और पैर में पट्टियां बंधी हुई है जो किसी भी कार्य करने में असहाय है। उसको जिला अस्पताल द्वारा दिए जाने वाला भोजन को फर्श पर रखकर चले गए। जिससे यह प्रतीत होता है कि जिला अस्पताल के उच्च अधिकारी से लेकर डॉक्टर और स्वास्थ्य कर्मी लावारिस वार्ड में भर्ती अज्ञात मरीजों के जीवन और इलाज के लिए कितने फिक्रमंद है। अधिकतर लावारिस वार्डों में मार्ग दुर्घटना में घायल अज्ञात, मानसिक विक्षिप्त अज्ञात और अन्य गंभीर बीमारियों के अज्ञात मरीज भर्ती होते हैं। जिनका जीवन भगवान भरोसे होता है ना की धरती के कहे जाने वाले भगवान के भरोसे, इन भर्ती मरीजों के आगे पीछे कोई पूछने वाला नहीं होता है अगर होता तो इनकी यह दुर्दशा नहीं होती। बड़े-बड़े नेताओं और अधिकारियों का जिला अस्पताल में निरीक्षण तो होता है पर इन लावारिस मरीजों की तरफ किसी की निगाह नहीं जाती है। अगर वह भी इनकी नजरों में आते और उनकी भी शुद्ध लेने वाला कोई होता तो शायद उनकी है दुर्दशा नहीं होती।
जब इस बाबत जिला अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक से मिलने की कोशिश की गई तो अपनी व्यवस्था बढ़कर बाद में मिलने के लिए कहा गया।
